पाकिस्तान की मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें और उनके साथियों को भारत में शरण और आर्थिक मदद देने की गुहार लगाई है। उन पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया गया है। पाकिस्तानी मीडिया ने रविवार को इस बात की जानकारी दी।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में उन्होंने ब्रिटेन से पाकिस्तान में रह रहे अपने समर्थकों को एक भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद इस साल 10 अक्टूबर को ब्रिटेन की क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस ने हुसैन पर आतंकवाद से जुड़ा मामला दर्ज किया था। जून 2020 में उनके खिलाफ स्टैंड ट्रायल होना है और जमानत शर्तो के तहत ब्रिटेन की पुलिस के पास उनका पासपोर्ट जमा कराया गया है।
अदालत द्वारा अनुमति नहीं मिलने तक उन्हें किसी भी यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं है। वकील अब इस बात का आकलन कर रहे हैं कि ट्रायल से पहले प्रधानमंत्री मोदी से शरण की बात कहकर क्या उन्होंने जमानत की शर्तो को उल्लंघन किया है या नहीं। ब्रिटेन पुलिस द्वारा उन्हें शर्तो के साथ जमानत दिए जाने के बाद अपने पहले सार्वजनिक भाषण में एमक्यूएम के नेता ने कहा कि वह भारत की यात्रा करना चाहते हैं क्योंकि उनके दादा-दादी वहीं दफन हैं।
उन्होंने कहा, “यदि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे इजाजत दें, तो मैं अपने साथियों के साथ भारत आने के लिए तैयार हूं क्योंकि मेरे दादा-दादी की कब्रें वहीं हैं। मेरे हजारों रिश्तेदारों की कब्रें वहीं हैं। मैं भारत जाकर उनकी कब्रों को देखना चाहता हूं।”
मोदी को संबोधित करते हुए हुसैन ने आरोप लगाया कि 22 अगस्त 2017 के बाद कराची में उनकी संपत्ति, घर और कार्यालय को पाकिस्तानी सरकार ने कब्जे में कर लिया। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा कि अगर वह उन्हें शरण नहीं दे सकते हैं, तो वे पैसे के साथ उनकी मदद करें। सितंबर में हुसैन का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था, जिसमें वह भारतीय देशभक्ति गीत ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ गा रहे थे।


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