10 साल के बच्चे से 10 रुपये में करा रहे थे मजदूरी

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Delhi News : राजधानी दिल्ली में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शाहदरा जिले के गांधी नगर इलाके में सिलाई-कढ़ाई और आर्टिफिशियल ज्वेलरी की फैक्ट्रियों से 19 बच्चों को मुक्त कराया गया। इनमें 10 से 17 साल तक के बच्चे शामिल हैं, जिनमें एक लड़की भी है। हैरानी की बात है कि 10 साल के एक बच्चे को पूरे दिन काम करने के बदले सिर्फ 10 रुपये मिलते थे। वहीं, कुछ बच्चों को सप्ताह भर की मजदूरी के रूप में महज 10, 50 और 200 रुपये दिए जाते थे। कार्रवाई के दौरान कई फैक्ट्रियों को सील कर दिया…

Delhi News : राजधानी दिल्ली में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शाहदरा जिले के गांधी नगर इलाके में सिलाई-कढ़ाई और आर्टिफिशियल ज्वेलरी की फैक्ट्रियों से 19 बच्चों को मुक्त कराया गया। इनमें 10 से 17 साल तक के बच्चे शामिल हैं, जिनमें एक लड़की भी है। हैरानी की बात है कि 10 साल के एक बच्चे को पूरे दिन काम करने के बदले सिर्फ 10 रुपये मिलते थे।

वहीं, कुछ बच्चों को सप्ताह भर की मजदूरी के रूप में महज 10, 50 और 200 रुपये दिए जाते थे। कार्रवाई के दौरान कई फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया। डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा के अनुसार, गांधी नगर थाना पुलिस ने बाल मजदूरी की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज कर यह कार्रवाई की। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन से मिली जानकारी के बाद एसडीएम, तहसीलदार, श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और विभिन्न बाल अधिकार संगठनों की संयुक्त टीम ने फैक्ट्रियों में छापेमारी की।

जांच में पता चला कि बच्चों को उत्तर प्रदेश और बिहार से बहला-फुसलाकर दिल्ली लाया गया था। वे करीब आठ महीने से इन फैक्ट्रियों में काम कर रहे थे। इनमें अधिकांश सिलाई-कढ़ाई का काम करते थे, जबकि चार बच्चे आर्टिफिशियल ज्वेलरी की पैकेजिंग में लगाए गए थे। मुक्त कराए गए बच्चों में पांच की उम्र 14 साल से कम है। दो बच्चे दिनभर काम करने के बाद रात में फैक्ट्री में ही सो जाते थे और सुबह दोबारा काम में जुट जाते थे। राष्ट्रीय संयोजक धनंजय टिंगल ने कहा कि बच्चों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें घर से दूर लाया गया और बचपन छीन लिया गया। जिस उम्र में उनके हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, उस उम्र में वे मशीनों के बीच काम कर रहे थे।

 

Sumant Chaudhary