Chhath Puja 2025 start date: बिहार के लिए सबसे बड़ा त्योहार छठ पूजा है। यह त्योहार दिवाली के तुरंत बाद आने वाला एक खास पर्व है। बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में इस महापर्व को लेकर धूम मचा है। विदेशों में बसे भारतीय भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ छठ पूजा मनाते हैं। जहां सभी देशवासी दिवाली का इंतजार करते हैं, वहीं बिहारी भाई-बहन छठ पूजा के महापर्व का इंतजार करते हैं। तो आइए जानें छठ पूजा कब है, नहाय-खाय का सही समय क्या है। सूर्य अर्ध्य देने का सही समय क्या है? इस लेख में हम यही सब जानेंगे।
Chhath Puja rituals: नहाय-खाय कब है?

छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह 25 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र स्नान करने के बाद अपने कुल देवता और सूर्य देव की विधिवत पूजा करते हैं। इसके पश्चात शुद्ध भोजन -चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी खाते है। इस दिन से छठ पर्व की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत होती है।
Chhath Puja celebration details: खरना पूजा कब मनाई जाएगी?

छठ पूजा का दूसरा दिन खरना के रूप में जाना जाता है, जो कार्तिक शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। इस वर्ष खरना की तिथि 26 अक्टूबर 2025 है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को स्नान कर छठी मैया की पूजा करते हैं। प्रसाद स्वरूप गुड़ की खीर (रसियाव) और रोटी बनाई जाती है। इसी दिन से छठ व्रत का कठोर नियम आरंभ होता है।
Chhath Puja 2025 start date: सूर्य को अर्घ्य कब दिया जाएगा?
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, और अगले दिन सप्तमी तिथि को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
(पूजा सामग्री)
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साफ और सुंदर घाट/स्थान
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फल (केला, सेब, संतरा आदि), नियाज़ (खजूर)
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ठेकुआ/प्रसाद — पारंपरिक मिठाई
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गेहूं/चावल, पानी, गंगाजल (यदि उपलब्ध)
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नारियल, नक्षत्र जलथैली (यदि परंपरा में हो)
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सर्वधर्म मलाएं, दीपक, गुड़/खीर
छठ पूजा 2025 – शुभ मुहूर्त व विवरण

षष्ठी तिथि प्रारंभ: 27 अक्टूबर 2025, सुबह 6:04 बजे
डूबते सूर्य को अर्घ्य: 27 अक्टूबर, शाम 5:40 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 28 अक्टूबर, सुबह 7:59 बजे
उगते सूर्य को अर्घ्य: 28 अक्टूबर, सुबह 6:30 बजे
बता दें कि यह चार दिवसीय छठ पर्व न केवल श्रद्धा, संयम और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह सूर्य उपासना के माध्यम से प्रकृति, जीवन और परिवार के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनुपम अवसर भी है।
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