Nitish Kumar Rajya sabha Nomination : आरजेडी सांसद मनोज झा ने बिहार में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के युग के अंत की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये कौन से विद्वान व्यक्ति ऐसा कह रहे हैं।
उन्होंने कहा, युग का अंत यूं ही नहीं होता और सच तो यह है कि जो भी इतिहास व राजनीति विज्ञान के छात्र रहे हैं, वे जानते हैं कि किसी युग का अंत नहीं होता है। उन्होंने कहा कि युग कैलेंडर की तरह थोड़ी है कि 30 तारीख के बाद अगला महीना आएगा। निरंतरता भी कोई चीज होती है।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि जो लोग इस तरह के मंसूबे पाल रहे हैं, उनको समझना चाहिए कि बिहार की धरती का जर्रा-जर्रा प्रगतिशील राजनीति के पक्ष में रहता है। प्रतिगामी राजनीति के पक्ष में नहीं रहता। मनोज झा ने कहा कि हलाल-झटका के पक्ष में नहीं रहता। ये सब लोगों को समझना चाहिए।
Nitish Kumar Rajya sabha Nomination: ‘सब कुछ आ जाएगा बाहर’

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के सोशल मीडिया हैंडल से जो पोस्ट डाली गई और उसी दिन बिहार के गवर्नर भी बदल जाते हैं। इसके पीछे जाहिर है कि कुछ न कुछ खेल है। हिंदुस्तान में कितनी भी गोपनीयता होती है लेकिन वो चंद दिनों के लिए होती है। बाद में सब कुछ बाहर आ ही जाएगा।
बता दें कि नीतीश कुमार के राज्यसभा उम्मीदवार के लिए नामांकन करने के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आरडजेडी नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को कहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं; उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है। हमें पता है कि क्या हो रहा है और वह किस दौर से गुजर रहे हैं। अगर हम वहां होते, तो शायद नीतीश कुमार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार दबाव बना रही थी। आखिरकार, यह तो होना ही था। नीतीश कुमार ने 20 साल तक बिहार की सेवा की और हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
Nitish Kumar Rajya Sabha Nomination: नीतीश जाएंगे राज्यसभा

बिहार चुनाव में एनडीए गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. इस जीत का श्रेय नीतीश कुमार को गया क्योंकि उन्होंने 75 साल की उम्र में जिस तत्परता से चुनाव में अपनी सक्रियता दिखाई वह हैरान करने वाली थी।
विपक्ष लगातार नीतीश के स्वास्थ्य का मुद्दा बनाता रहा मगर नीतीश कुमार ने चुनाव दर चुनाव रैली कर यह बता दिया कि वे इस राजनीति के सबसे पके खिलाड़ी हैं।
हालांकि बीते लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए नीतीश कुमार को शपथ लिए हुए 105 दिन ही गुज़रे थे कि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया, जिसने राज्य में बन रहे नए समीकरणों को लेकर कई सवाल छोड़ दिए।


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