Javed Akhtar Birthday Special: जावेद अख्तर आज 81 साल के हो गए हैं। अपनी शानदार कहानियों और यादगार संवादों से उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी। उनके जन्मदिन पर जानिए वे मशहूर फिल्में, जिनकी कहानी उन्होंने लिखी, लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। भारतीय सिनेमा में जब भी असरदार कहानियों और जानदार किरदारों की बात होती है, तो जावेद अख्तर का नाम सबसे पहले आता है। उन्हें ‘कलम का शहंशाह’ कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने अपनी लेखनी से हीरो की छवि को चॉकलेट बॉय से बदलकर एंग्री यंग मैन बनाया, तो खलनायकों को भी ‘मोगैम्बो’ जैसी अमर पहचान दी। ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘जंजीर’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा की परिभाषा ही बदल दी।
Javed Akhtar Birthday Special: उनकी कुछ आइकॉनिक फिल्में, जिन्होंने हीरो से लेकर खलनायक तक की बदल दी परिभाषा
1. Sholay

यह भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महान फिल्म मानी जाती है। सलीम-जावेद की जोड़ी ने जय, वीरू और गब्बर सिंह जैसे यादगार किरदार रचे। इस फिल्म के डायलॉग्स, जैसे कितने आदमी थे?, आज भी हर भारतीय की जुबान पर रहते हैं। शोले मूवी साल 1975 में रिलीज हुई थी।
2. Deewar

साल 1975 में रिलीज हुई यह फिल्म दो भाइयों की कहानी है- एक अपराधी (अमिताभ बच्चन) और दूसरा पुलिसवाला (शशि कपूर) इसका मंदिर वाला सीन और मशहूर डायलॉग ‘मेरे पास मां है’ आज भी क्लासिक माने जाते हैं। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की यह मूवी कल्ट साबित हुई थी।
3. Zanjeer

इस फिल्म ने सलीम-जावेद और अमिताभ बच्चन किस्मत बदल दी थी। उस दौर के चॉकलेट हीरो के चलन को तोड़ते हुए उन्होंने एक ऐसा हीरो पेश किया जो न नाचता था, न गा ता था और न ही मुस्कुराता था। यहीं से एक गंभीर और इंसाफ मांगने वाले हीरो की शुरुआत हुई, जंजीर साल 1973 में आई थी।
4. Mr India

सलीम-जावेद की जोड़ी के अलग होने से पहले यह उनकी आखिरी कुछ स्क्रिप्ट्स में से एक थी। यह भारत की सबसे पसंदीदा साइंस फिक्शन सुपरहीरो फिल्म है। गायब होने वाले हीरो (अनिल कपूर) और कभी न भूलने वाले विलेन ‘मोगैम्बो’ (अमरीश पुरी) ने इसे अमर बना दिया। यह मूवी साल 1983 में रिलीज हुई थी।
5. Don

यह एक बेहद स्टाइलिश थ्रिलर फिल्म थी, जिसने बॉलीवुड को सबसे शानदार एंटी-हीरो दिया। एक शातिर अपराधी और उसके हमशक्ल का आइडिया अपने समय से इतना आगे था कि आज भी इस फिल्म के रीमेक और फ्रेंचाइजी लोगों की पहली पसंद हैं। अमिताभ बच्चन की यह मूवी साल 1978 में बड़ी कामयाब साबित हुई।
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