Budget समझने से पहले जान लें 30 जरूरी टर्म! आसान भाषा में समझ आ जाएगा पूरा बजट

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Budget 2026 Words Explained: हर साल बजट के समय एक ही सवाल होता है। सरकार ने आखिर कहा क्या? असल में बजट (What is union Budget) कोई कठिन चीज नहीं है। सरकार सिर्फ दो बातें बताती है: 1. पैसा कहां से आएगा 2. पैसा कहां खर्च होगा। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। इसका सीधा असर आपकी कमाई, टैक्स, महंगाई, नौकरी और बचत पर पड़ेगा। इसलिए बजट की भाषा समझना जरूरी है। Budget 2026 Words Explained: ये हैं जरूरी टर्म रेवेन्यू बजट (Revenue Budget) रेवेन्यू बजट सरकार की…

Budget 2026 Words Explained: हर साल बजट के समय एक ही सवाल होता है। सरकार ने आखिर कहा क्या? असल में बजट (What is union Budget) कोई कठिन चीज नहीं है। सरकार सिर्फ दो बातें बताती है: 1. पैसा कहां से आएगा 2. पैसा कहां खर्च होगा।

1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट पेश किया है। इसका सीधा असर आपकी कमाई, टैक्स, महंगाई, नौकरी और बचत पर पड़ेगा। इसलिए बजट की भाषा समझना जरूरी है।

Budget 2026 Words Explained: ये हैं जरूरी टर्म

रेवेन्यू बजट (Revenue Budget)

रेवेन्यू बजट सरकार की रोज़मर्रा की आमदनी और खर्च का हिसाब होता है। सरकार की कमाई इनकम टैक्स, जीएसटी, कॉरपोरेट टैक्स, फीस और जुर्माने से होती है। इसी पैसे से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, सब्सिडी और दफ्तरों का खर्च चलता है। यानी जो पैसा आता है और उसी साल खर्च हो जाता है, वही रेवेन्यू बजट है।

कैपिटल बजट (Capital Budget)

कैपिटल बजट भविष्य के लिए किया गया खर्च दिखाता है। इसमें सड़कें, रेलवे, स्कूल, अस्पताल, एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट आते हैं। साथ ही सरकार कितना कर्ज ले रही है या कहां निवेश कर रही है, ये भी इसमें शामिल होता है।
आज खर्च, लेकिन फायदा लंबे समय तक – यही कैपिटल बजट की पहचान है।

GDP (सकल घरेलू उत्पाद)

GDP बताता है कि देश ने एक साल में कुल कितना उत्पादन किया। खेती, फैक्ट्री, दुकान और सर्विस सेक्टर – सब इसमें गिने जाते हैं। GDP बढ़े तो माना जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं।

राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)

जब सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज्यादा हो जाता है, तो जो कमी बचती है उसे फिस्कल डेफिसिट कहते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है। ज्यादा फिस्कल डेफिसिट मतलब ज्यादा उधार।

Budget 2026 Words Explained (S-M)
Budget 2026 Words Explained (S-M)

कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure)

ये ऐसा खर्च है जिससे देश की संपत्ति बढ़ती है। जैसे हाईवे, रेलवे लाइन, स्कूल और अस्पताल। इस खर्च से भविष्य में विकास तेज होता है।

राजस्व खर्च (Revenue Expenditure)

ये खर्च सरकार को चलाने के लिए जरूरी होता है, लेकिन इससे कुछ नया नहीं बनता। जैसे सैलरी, पेंशन, सब्सिडी और बिजली-पानी का खर्च।

डायरेक्ट टैक्स

जो टैक्स आप सीधे सरकार को देते हैं, जैसे इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स। इसे किसी और पर नहीं डाला जा सकता।

इनडायरेक्ट टैक्स

जो टैक्स सामान की कीमत में पहले से जुड़ा होता है, जैसे GST। आप जब सामान खरीदते हैं, टैक्स अपने आप चुक जाता है।

Budget 2026 Words Explained (S-M)
Budget 2026 Words Explained (S-M)

इनकम टैक्स

आपकी सालाना कमाई पर लगने वाला टैक्स इनकम टैक्स कहलाता है। बजट में टैक्स स्लैब और छूट बदली जा सकती है, इसलिए मिडिल क्लास इस पर खास ध्यान देता है।

कॉरपोरेट टैक्स

कंपनियों के मुनाफे पर लगने वाला टैक्स कॉरपोरेट टैक्स होता है। अगर ये कम हो, तो निवेश और नौकरी के मौके बढ़ सकते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)

अगर आपने शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी लंबे समय बाद बेचकर मुनाफा कमाया, तो वह LTCG कहलाता है। इस पर टैक्स आमतौर पर कम होता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)

अगर वही निवेश कम समय में बेच दिया जाए, तो मुनाफा STCG कहलाता है। इस पर टैक्स ज्यादा लगता है।

राजस्व घाटा (Revenue Deficit)

जब सरकार की रोज़ की कमाई, रोज़ के खर्च से कम हो जाए, तो उसे राजस्व घाटा कहते हैं। इसका मतलब सरकार उधार लेकर खर्च चला रही है।

टैक्स रेवेन्यू

सरकार को टैक्स से कुल जितनी कमाई होती है, उसे टैक्स रेवेन्यू कहते हैं।

नॉन-टैक्स रेवेन्यू

सरकार की कमाई सिर्फ टैक्स से नहीं होती। सरकारी कंपनियों का मुनाफा, ब्याज, पासपोर्ट फीस, रेलवे टिकट और कोर्ट फीस भी इसमें शामिल होती है।

महंगाई (Inflation)

जब वही सामान पहले से ज्यादा महंगे दाम में मिलने लगे, तो उसे महंगाई कहते हैं। महंगाई बढ़ने से EMI और घर का खर्च बढ़ जाता है और बचत मुश्किल हो जाती है।

फिस्कल पॉलिसी

सरकार टैक्स और खर्च को कैसे संभालती है, इसे फिस्कल पॉलिसी कहते हैं। यानी सरकार का पैसे मैनेज करने का तरीका।

मौद्रिक नीति (Monetary Policy)

ये RBI की जिम्मेदारी होती है। RBI ब्याज दर घटा-बढ़ाकर लोन को सस्ता या महंगा बनाता है।

उत्पाद शुल्क (Excise Duty)

अब ज्यादातर एक्साइज टैक्स खत्म हो चुका है। फिलहाल पेट्रोल, डीजल और शराब पर एक्साइज ड्यूटी लगती है।

सेस (Cess)

सेस एक अतिरिक्त टैक्स होता है, जो किसी खास काम के लिए लगाया जाता है। इसका पैसा राज्यों को नहीं, सिर्फ केंद्र सरकार को मिलता है।

जीरो-बेस्ड बजट

इस बजट में पुराने खर्च को आधार नहीं माना जाता। हर योजना को नए सिरे से सही ठहराना पड़ता है, जिससे फालतू खर्च रुकता है।

प्राथमिक घाटा (Primary Deficit)

फिस्कल डेफिसिट में से पुराने कर्ज का ब्याज घटाने के बाद जो घाटा बचता है, वही प्राथमिक घाटा है।

करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD)

अगर देश का आयात ज्यादा और निर्यात कम हो, तो CAD बढ़ता है। इससे रुपया कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।

वोट-ऑन-अकाउंट

जब पूरे साल का बजट पास नहीं होता, तो कुछ महीनों के खर्च की अनुमति ली जाती है। इसे वोट-ऑन-अकाउंट कहते हैं।

अंतरिम बजट

चुनाव से पहले पेश किया जाने वाला बजट अंतरिम बजट कहलाता है। इसमें बड़े ऐलान नहीं किए जाते।

पाप टैक्स (Sin Tax)

शराब, सिगरेट और तंबाकू जैसी चीजों पर लगाया गया भारी टैक्स सिन टैक्स कहलाता है। इसका मकसद बुरी आदतें कम करना और सरकार की कमाई बढ़ाना होता है।

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स

जब कंपनी मुनाफा शेयरधारकों को देती है, तो उस पर टैक्स लगता है। अब ज्यादातर मामलों में यह टैक्स निवेशक देता है।

बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स

बहुत ज्यादा कैश निकालने पर टैक्स लगाने की व्यवस्था को BCTT कहते हैं। फिलहाल यह लागू नहीं है।

अतिरिक्त अनुदान

अगर किसी योजना के लिए तय पैसा कम पड़ जाए, तो सरकार संसद से अतिरिक्त अनुमति लेती है। इसे अतिरिक्त अनुदान कहते हैं।

एक्सपेंडिचर प्रोफाइल

यह बजट का वह हिस्सा है जो बताता है किस मंत्रालय को कितना पैसा मिला और कहां खर्च हुआ। इसे सरकार के खर्च का रिपोर्ट कार्ड भी कह सकते हैं।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।