Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के कुरूद विधानसभा क्षेत्र से विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर से जुड़े एक पुराने वीडियो को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। आरोप है कि मार्च 2026 के एक पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का बताकर प्रसारित किया गया। इस मामले में अजय चंद्राकर ने मानहानि की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
अजय चंद्राकर मंगलवार को धमतरी सिविल न्यायालय पहुंचे। यहां उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में कांग्रेस की राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर के खिलाफ मानहानि से जुड़ी विधिक कार्रवाई शुरू की। चंद्राकर की ओर से कहा गया है कि सोशल मीडिया पर जिस वीडियो को लेकर दावा किया गया, वह 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का नहीं है। उनके अनुसार, वीडियो को गलत तारीख और संदर्भ के साथ साझा किया गया।
सोशल मीडिया पोस्ट में क्या दावा किया गया था?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के साथ दावा किया गया था कि 15 अगस्त को कुरूद में अजय चंद्राकर ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की जगह भारतीय जनता पार्टी का झंडा फहराया। इस दावे के बाद चंद्राकर की ओर से सफाई दी गई कि वायरल वीडियो स्वतंत्रता दिवस समारोह से संबंधित नहीं है। उन्होंने वीडियो की तारीख और उसके वास्तविक संदर्भ को अलग बताया है।
अजय चंद्राकर के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा वीडियो 22 मार्च 2026 को कुरूद में आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम का है। उनका कहना है कि इस पुराने वीडियो को 15 अगस्त के कार्यक्रम से जोड़कर पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि वीडियो को अलग संदर्भ में प्रसारित किए जाने से लोगों के बीच गलत जानकारी पहुंची और उनके बारे में एक अलग धारणा बनने की स्थिति पैदा हुई।
पहले पुलिस में भी की गई थी शिकायत
इस मामले को लेकर पहले पुलिस के समक्ष भी शिकायत की गई थी। चंद्राकर की ओर से बताया गया है कि शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई भी की थी। अब इसी प्रकरण को लेकर न्यायालय में मानहानि संबंधी कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
चंद्राकर का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति से जुड़ी सामग्री को सही तथ्य और संदर्भ के साथ प्रस्तुत करना जरूरी है। यदि किसी पुराने वीडियो को नई घटना से जोड़कर प्रसारित किया जाता है, तो इससे संबंधित व्यक्ति की सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
न्यायिक प्रक्रिया पर जताया भरोसा
अजय चंद्राकर ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ तथ्यों की सही जानकारी देना और जिम्मेदारी से सामग्री साझा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीडियो या सामग्री को उसके वास्तविक संदर्भ से अलग करके सार्वजनिक किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया के जरिए सही तथ्य सामने रखे जाने चाहिए।
चंद्राकर ने न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस मामले में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित निर्णय की उम्मीद है। अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष चलेगी।
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