Chhattisgarh Tourism: कभी नक्सल प्रभावित राज्य की पहचान से जूझता रहा छत्तीसगढ़ अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, भव्य जलप्रपातों, प्राचीन विरासत और समृद्ध जनजातीय संस्कृति से परिपूर्ण यह प्रदेश आज देश के तेजी से उभरते पर्यटन हब के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के सक्रिय मार्गदर्शन ने प्रदेश में पर्यटन विकास को नई गति प्रदान की है।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन का उद्योग दर्जा, नए निवेश और विकास के प्रयास
राज्य सरकार ने पर्यटन को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए नई औद्योगिक नीति 2024-30 में इसे उद्योग का दर्जा दिया है। इसके तहत निवेशकों को सब्सिडी, टैक्स में छूट और विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतिगत फैसलों का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है और प्रदेश में इको-टूरिज्म, एथनिक टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन स्थलों का सुनियोजित विकास, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और नए पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ तेजी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
पर्यटकों के लिए बस्तर की संस्कृति बनी आकर्षण का केंद्र

विशेष रूप से बस्तर संभाग अपनी अनूठी जनजातीय संस्कृति के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गोंड, मुरिया, हल्बा और बैगा जनजातियों की पारंपरिक जीवनशैली, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और खानपान पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं। प्रदेश के पंथी, राउत नाचा, सुवा और कर्मा जैसे लोकनृत्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध बना रहे हैं।
प्रदेश के प्राकृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
चित्रकोट जलप्रपात, जिसे एशिया का नियाग्रा कहा जाता है, अपनी भव्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। जशपुर का मधेश्वर पर्वत, कुटुमसर की रहस्यमयी गुफाएं, रामगढ़ की प्राचीन नाट्यशाला और डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यूएनडब्ल्यूटीओ द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित धुड़मारास गांव ने भी छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई है।
पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और रोजगार में वृद्धि

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के विशेष प्रयासों से इन सभी पर्यटन स्थलों पर सड़क, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और पर्यटक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। पर्यटन अब केवल भ्रमण का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनता जा रहा है। होम-स्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय भोजन और पर्यटन सेवाओं के माध्यम से लोगों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के सक्रिय मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ अब नक्सल प्रभावित राज्य की छवि से बाहर निकलकर पर्यटन की नई पहचान बना रहा है। विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक समृद्धि के समन्वय से छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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