नई दिल्ली : केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण द्वारा दिल्ली के पानी को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से कराई गई जांच में पानी पीने योग्य न होने की रिपोर्ट के बाद दिल्ली में सियासी जंग छिड़ गई है। यह जंग दिल्ली के तीनों सियासी दल आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस कूद पड़ी है।
दिल्ली में विधानसभा चुनाव का माहौल बना हुआ है, ऐसे में भाजपा पानी की इस रिपोर्ट के आधार पर इसे चुनावी मुद्दा बनाने निकल पड़ी है। इससे पहले शनिवार को केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने दिल्ली के पानी की रिपोर्ट जारी की थी। रविवार को इस मसले पर आप पार्टी के नेता, मंत्री और सांसद खड़े हो गए और बयानबाजी शुरू हो गई। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पासवान को आड़े हाथों लेते हुए तंज किया कि मौसम वैज्ञानिक अब पानी वैज्ञानिक बन गए हैं।
दिल्ली जल बोर्ड बीआईएस के इस रिपोर्ट को मानने से इंकार कर दिया है। मंत्री दिनेश मोहनिया ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि एक केन्द्रीय मंत्री दिल्ली के पानी की क्वालिटी यूरोपियन स्टैंडर्ड से बेहतर बता रहे हैं तो दूसरे मंत्री दूषित ठहरा हैं, कौन सभी यह तो वही बता पाएंगे? बहरहाल इस मुद्दे ने भाजपा और कांग्रेस को एक मुद्दा दे दिया है, जिसको लेकर दोनों राजनीतिक पार्टियां दिल्ली की केजरीवाल सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने में लग गई हैं।
भाजपा ने तो रविवार को घोषणा भी कर दी है कि वह दिल्ली में 400 जगहों से पानी के सैंपल लेकर उनकी जांच करवाएगी और दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी मोर्चा खोलने की घोषणा की है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी कभी भी ऐसी स्थिति नहीं आई, लेकिन अब तो दिल्ली में प्रदूषण के साथ-साथ दिल्ली का पानी भी दूषित हो गया है।
आखिर दिल्ली के लोग कहां जाएंगे? जल्द ही पानी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी। दूसरी तरफ अपने ऊपर हुए आप पार्टी के हमले के बाद कहा है कि क्यों नहीं शुद्ध पार्टी को भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में शामिल कर दिया जाए, ताकी दूषित पानी को भी उपभोक्ता अदालत में चुनौती दी जा सके।


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