BRICS: मजबूत रिश्तों से बढ़ेगा व्यापार, गैर-शुल्क बाधाएं हटाने और स्थानीय मुद्रा में भुगतान पर जोर

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BRICS/ सुरेंद्र पंडित : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 में कारोबार और उद्योग जगत ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक सद्भावना और आपसी संबंधों को अब ठोस व्यावसायिक साझेदारियों में बदलने का समय आ गया है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले उद्योग जगत ने कहा कि सदस्य देशों के बीच जितने मजबूत और मधुर संबंध होंगे, व्यापार और आर्थिक विकास की रफ्तार उतनी ही तेज होगी। फोरम में कारोबारियों ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क…

BRICS/ सुरेंद्र पंडित : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 में कारोबार और उद्योग जगत ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक सद्भावना और आपसी संबंधों को अब ठोस व्यावसायिक साझेदारियों में बदलने का समय आ गया है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले उद्योग जगत ने कहा कि सदस्य देशों के बीच जितने मजबूत और मधुर संबंध होंगे, व्यापार और आर्थिक विकास की रफ्तार उतनी ही तेज होगी।
फोरम में कारोबारियों ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल और तेज करने तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने की जरूरत बताई।

स्थानीय मुद्रा में भुगतान पर जोर

व्यापार जगत ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि आसान और भरोसेमंद स्थानीय मुद्रा भुगतान तंत्र से सीमा-पार कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है और लेन-देन की लागत भी कम हो सकती है।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जोड़ने की वकालत

फोरम में भारत के यूपीआई (UPI) जैसे सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अन्य ब्रिक्स देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ जोड़ने की भी वकालत की गई। कारोबार जगत का कहना है कि डिजिटल भुगतान नेटवर्क के बेहतर एकीकरण से छोटे और मध्यम कारोबारियों समेत सभी वर्गों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिक सुगम हो सकता है।

मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने की जरूरत

वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की अपनी-अपनी ताकत और क्षमताओं को पहचानकर मजबूत, सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
भारतीय उद्योग जगत को आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से उम्मीद है कि व्यापार को बढ़ावा देने के लिए गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, स्थानीय मुद्रा में भुगतान को सुविधाजनक बनाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे ठोस फैसले लिए जाएंगे। उद्योग जगत का मानना है कि अगर इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच प्रभावी सहमति बनती है, तो ब्रिक्स न केवल आपसी व्यापार को नई गति दे सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

Sumant Chaudhary