राजधानी में बदला मशहूर ब्रिटानिया चौक का नाम, अब पंजाब केसरी के पूर्व संपादक अश्विनी मिन्ना के नाम पर होगी नई पहचान

Britannia Chowk to Be Renamed: दिल्ली की पहचान माने जाने वाले मशहूर ब्रिटानिया चौक का नाम अब बदल दिया गया है। राजधानी के इस प्रमुख चौराहे को अब “अश्विनी मिन्ना चौक” (Britannia chowk to Ashwini Kumar Minna) के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले के बाद इलाके में नई चर्चा शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव एक ऐसे व्यक्ति के सम्मान में किया गया है, जिन्होंने समाज और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटानिया चौक दिल्ली के सबसे व्यस्त और चर्चित चौराहों में से एक माना जाता है। यह जगह राजधानी के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ती है और हर दिन यहां हजारों वाहन गुजरते हैं। लंबे समय से लोग इस चौक को ब्रिटानिया चौक के नाम से जानते थे, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर इसका नया नाम लागू कर दिया गया है।

Britannia Chowk to Be Renamed: सरकार ने जारी किया आदेश

सरकार और संबंधित विभागों की ओर से नाम बदलने को लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद इलाके में लगे साइन बोर्ड और दिशा संकेतक भी बदले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में यहां नए नाम वाले बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। अधिकारियों के मुताबिक, नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक नियमों के तहत की गई है। स्थानीय निकाय और संबंधित विभागों की मंजूरी के बाद इस फैसले को अंतिम रूप दिया गया। नए साइन बोर्ड में अश्वनी मिन्ना जी की तस्वीर वाला एक पैन का साइन बोर्ड नजर आएगा। जिसकी एक तस्वीर भी सामने आई है।

Ashwini Kumar Minna: कौन थे अश्विनी मिन्ना?

अश्विनी कुमार चोपड़ा, जिन्हें लोग प्यार से ‘मिन्ना’ भी कहते थे, देश के जाने-माने पत्रकार, नेता और पूर्व क्रिकेटर थे। उन्होंने पत्रकारिता, राजनीति और खेल तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। वे हिंदी अखबार पंजाब केसरी के मुख्य संपादक रहे और हरियाणा के करनाल से सांसद भी चुने गए थे। अश्विनी कुमार चोपड़ा का जन्म 11 जून 1956 को पंजाब के जालंधर में हुआ था। वे देश के प्रसिद्ध ‘हिंद समाचार’ समूह के पत्रकार परिवार से जुड़े थे। उनका परिवार लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़ा रहा है। उनके दादा लाला जगत नारायण और पिता रमेश चंद्र ने समाज और पत्रकारिता के लिए बड़ी भूमिका निभाई। आतंकवाद के कठिन दौर में दोनों की आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके बावजूद परिवार ने सच और निर्भीक पत्रकारिता का रास्ता नहीं छोड़ा।

क्रिकेट में भी दिखाया दम

बहुत कम लोग जानते हैं कि पत्रकारिता में आने से पहले अश्विनी कुमार चोपड़ा एक अच्छे क्रिकेटर भी थे। उन्होंने 1975-76 से 1979-80 तक पंजाब की रणजी टीम के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला। वे तेज गेंदबाज के रूप में टीम का हिस्सा रहे और खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून युवावस्था से ही था।

पत्रकारिता में बनाई खास पहचान

अश्विनी कुमार चोपड़ा ने पंजाब विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से पत्रकारिता की शिक्षा हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भारत लौट आए और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। उन्होंने पंजाब केसरी के दिल्ली संस्करण के मुख्य संपादक की जिम्मेदारी संभाली। वे अपने साफ, बेबाक और निर्भीक लेखन के लिए पहचाने जाते थे। उनके संपादकीय आम लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाते थे। पत्रकारिता में उनकी शैली सीधी और प्रभावशाली मानी जाती थी, जिसके कारण उन्हें काफी सम्मान मिला।

राजनीति में भी मिली सफलता

साल 2014 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर हरियाणा की करनाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे भारी मतों से जीतकर सांसद बने। उन्होंने 2014 से 2019 तक 16वीं लोकसभा में करनाल का प्रतिनिधित्व किया। सांसद के रूप में उन्होंने कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को उठाया। अश्विनी कुमार चोपड़ा का 18 जनवरी 2020 को निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 63 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पत्रकारिता और राजनीति जगत को बड़ी क्षति पहुंची। आज भी लोग उन्हें एक निडर पत्रकार, जिम्मेदार नेता और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में याद करते हैं।

जल्द दिखेगा नया नाम

प्रशासन की ओर से चौक के आसपास लगे पुराने बोर्ड हटाने और नए बोर्ड लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इसके अलावा डिजिटल मैप और सरकारी रिकॉर्ड में भी नया नाम अपडेट किया जाएगा। राजधानी में इस बड़े बदलाव के बाद अब ब्रिटानिया चौक इतिहास का हिस्सा बन जाएगा और आने वाले समय में लोग इस जगह को “अश्विनी मिन्ना चौक” के नाम से जानेंगे।

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