Cyber Fraud Fears Delhi: राष्ट्रीय राजधानी के एनडीएमसी क्षेत्र में जनगणना से पहले मकानों के सूचीकरण का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती लोगों से मोबाइल नंबर जुटाना बनती जा रही है। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के कारण लुटियंस दिल्ली में रहने वाले कुछ लोग अपना नंबर साझा करने से हिचकिचा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपनी पर्सनल जानकारी देने में भी असहज महसूस कर रहे हैं, जिससे सर्वे टीमों को थोड़ी परेशानी हो रही है। वहीं, कई जगहों पर लोग आसानी से पूरी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। शनिवार दोपहर चाणक्यपुरी स्थित रेलवे कॉलोनी में सर्वे के दौरान टीमों और प्रभारी अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाते दिखे। टीम के गले में पहचान पत्र, हाथ में मोबाइल ऐप और जरूरी दस्तावेजों के साथ टीम आवासीय घरों में पहुंचकर बातचीत करते हुए नजर आई।
टीम परिवार से जुड़े करीब 33 सवाल पूछ रही
सर्वे के दौरान टीम परिवार से जुड़े करीब 33 सवाल पूछ रही है, जिनमें मकान की स्थिति, परिवार के सदस्य, शौचालय, परिवार में खाया जाने वाला मुख्य अनाज, डिजिटल सुविधाएं और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां शामिल हैं। सर्वे कर रहीं शिक्षिका पिंकी ने बताया कि इस कार्य के लिए उन्हें पूरा प्रशिक्षण दिया गया है और अधिकांश लोग सहयोग भी कर रहे हैं, लेकिन मोबाइल नंबर पर पहुंचते ही कई लोग असहज हो जाते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग अन्य सवालों के जवाब देने में भी हिचकिचाते हैं। उनके मन में यह संकोच रहता है कि वे अपनी निजी जानकारी किसी के साथ क्यों साझा करें। ऐसी स्थिति में सर्वे टीमों को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं।
आईडी कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज दिखाने की मांग
ऐसी स्थिति में लोग टीम से आईडी कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज दिखाने की मांग करते हैं। इसके चलते सर्वे टीम को अपनी पहचान साबित करने के लिए आधिकारिक पत्र और पहचान पत्र प्रस्तुत करने पड़ते हैं। कई बार लोगों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें प्रभारी अधिकारी से फोन पर भी बात करानी पड़ती है, जिसके बाद ही वे मोबाइल नंबर साझा करने के लिए तैयार होते हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर सर्वे बिना किसी परेशानी के सुचारू रूप से चल रहा है और लोग आसानी से सभी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इस अभियान के तहत हर घर की पहचान के लिए दीवारों पर निशान भी लगाए जा रहे हैं, जबकि पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है। इसके बावजूद मोबाइल नंबर को लेकर लोगों की झिझक सर्वे की रफ्तार को प्रभावित कर रही है।
गवर्नमेंट कार्यालयों को बिल्डिंगों में कर रहे काउंट
एनडीएमसी क्षेत्र में चल रहे मकानों के सूचीकरण अभियान को लेकर इंचार्ज अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतगणना के पहले चरण में केवल उन सभी प्रकार की इमारतों की गिनती की जा रही है, जिनमें लोग वास्तव में निवास करते हैं। चाहे वे कच्चे मकान हों या पक्के। उन्होंने बताया कि जिन सरकारी भवनों में सिर्फ दफ्तर संचालित होते हैं और कोई भी व्यक्ति निवास नहीं करता, उन्हें आवासीय सूचीकरण में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे भवनों को केवल सरकारी इमारत के रूप में चिह्नित कर आगे बढ़ा जा रहा है। एनडीएमसी क्षेत्र में मौजूद कई प्रमुख संस्थान जैसे पुलिस मुख्यालय, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य सरकारी कार्यालय इसी श्रेणी में आते हैं। इन सभी स्थानों को आवासीय गणना से अलग रखते हुए केवल उनकी पहचान दर्ज की जा रही है, ताकि सूचीकरण की प्रक्रिया सटीक और व्यवस्थित ढंग से पूरी की जा सके।


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