दिल्ली विधानसभा में गूंजी राम कथा: विजेंद्र गुप्ता बोले- श्री राम केवल आस्था नहीं बल्कि आचरण के जीवंत सिद्धांत हैं

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Delhi Assembly Ram Katha: राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि आचरण के जीवंत सिद्धांत हैं। यह बात दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा में बुधवार को अपने-अपने राम-राम कथा के आयोजन अवसर पर कही। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि एवं राम कथा वक्ता डॉ. कुमार विश्वास की प्रभावशाली प्रस्तुति ने लोगों से भरे सभागार को गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और सभ्यता संबंधी चिंतन के वातावरण में परिवर्तित कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा राम का जीवन हमें व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में कर्तव्य, संतुलन और न्याय को…

Delhi Assembly Ram Katha: राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि आचरण के जीवंत सिद्धांत हैं। यह बात दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा में बुधवार को अपने-अपने राम-राम कथा के आयोजन अवसर पर कही। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि एवं राम कथा वक्ता डॉ. कुमार विश्वास की प्रभावशाली प्रस्तुति ने लोगों से भरे सभागार को गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और सभ्यता संबंधी चिंतन के वातावरण में परिवर्तित कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा राम का जीवन हमें व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में कर्तव्य, संतुलन और न्याय को समझने की दिशा देता है, और इसी विचार ने पूरे कार्यक्रम की दिशा निर्धारित की।

इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद बांसुरी स्वराज, विधायकगण, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अनुरूप दिल्ली विधान सभा परिसर को केसरिया रंग से आलोकित किया गया, जिसने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को और सशक्त बनाया। जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की, वहीं भारी जनसमूह की सहभागिता ने इसकी व्यापक जनस्वीकृति को दर्शाया।

कार्यक्रम का केंद्रबिंदु डॉ. कुमार विश्वास की ‘अपने अपने राम – राम कथा’ रही, जो अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली और समकालीन प्रासंगिकता के लिए जानी जाती है। उन्होंने कविता, कथन और चिंतन के समन्वय के माध्यम से श्री राम के विविध आयामों को जीवंत किया, केवल एक महाकाव्य के नायक के रूप में नहीं, बल्कि एक शाश्वत नैतिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक आधार के रूप में। कथा में राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके जीवन के जटिल निर्णयों और मानवीय परिस्थितियों को भी उकेरा गया।

कर्तव्य और न्याय की राह दिखाता हैः विजेंद्र गुप्ता

परंपरागत कथा-वाचन से आगे बढ़ते हुए इस प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि श्री राम का जीवन आत्म-त्याग, संयम, करुणा और न्याय के सिद्धांतों का सशक्त उदाहरण है। कथा ने श्रोताओं को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि राम केवल पूजनीय नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक नैतिक ढांचा भी हैं, जहां धर्म के मार्ग पर चलना व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद सर्वोपरि रहता है। इस बहुस्तरीय प्रस्तुति ने राम कथा की सार्वभौमिकता को उजागर करते हुए उसे समकालीन शासन, जिम्मेदारी और नैतिक स्पष्टता से जोड़ा। पूरे संध्या काल तक चला यह कार्यक्रम एक गहन अनुभव बन गया, जिसमें श्रोता प्रारंभ से अंत तक पूरी तरह से लीन रहे। सभागार में एक विशेष शांति का वातावरण रहा, जिसे कथा के विभिन्न प्रसंगों ने और गहराई दी। त्याग, सत्यनिष्ठा, करुणा और साहस जैसे मूल्यों की अनुभूति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी उपस्थित रही, जिससे श्रोताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।

भक्ति के साथ-साथ जीवन के लिए एक मार्गदर्शक भी मिलता है

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल परंपरा का पुनरावलोकन नहीं करते, बल्कि उसे नए सिरे से समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। राम में हमें भक्ति के साथ-साथ जीवन के लिए एक मार्गदर्शक भी मिलता है, जो हर युग में प्रासंगिक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक पहल समाज के नैतिक और बौद्धिक आधार को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थानों को ऐसे मंच के रूप में भी कार्य करना चाहिए जहां परंपरा और आधुनिक विचारों के बीच सार्थक संवाद हो सके। उन्होंने आगे कहा कि विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन में श्री राम के आदर्श, जिम्मेदारी, संयम और न्याय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।