Delhi Metro : विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन के रूप में पहचान बना चुकी दिल्ली मेट्रो के हालिया फैसलों को लेकर यात्रियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ताजा विवाद मेट्रो ट्रेनों के भीतर ऑडियो विज्ञापन शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) का कहना है कि इससे गैर-परिचालन आय बढ़ेगी और जरूरी घोषणाएं प्रभावित नहीं होंगी, लेकिन यात्रियों का मानना है कि सफर के दौरान अतिरिक्त विज्ञापन उनकी सुविधा में बाधा बनेंगे।
मेट्रो के एक नियमित यात्री ने बताया कि दिल्ली मेट्रो की शुरुआत के समय छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य किसी भी वर्ग को रियायती यात्रा पास नहीं देने का फैसला किया गया था। लोगों ने इसे स्वीकार किया, क्योंकि उन्हें बेहतर और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की उम्मीद थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लिए गए कई फैसलों ने यात्रियों की नाराजगी बढ़ाई है, वहीं अन्य यात्रियों का कहना है कि भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में डिस्प्ले बोर्ड तक साफ दिखाई नहीं देता।
ऐसे में स्टेशन संबंधी घोषणाओं के बीच विज्ञापन सुनाना उनकी परेशानी बढ़ा सकता है, वहीं पहले से ही बैंक आधारित कार्ड को बढ़ावा देने, प्लास्टिक टोकन की जगह कागजी टिकट देने और स्टेशनों पर बढ़ते व्यावसायिक विज्ञापनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

DMRC का सुविधाओं को बढ़ाने की जगह राजस्व बढ़ाने पर जोर
DMRC की आय का बड़ा हिस्सा अब भी यात्रियों से मिलने वाले किराये से आता है, जबकि विज्ञापन, दुकानों, एटीएम, पार्किंग और अन्य गैर-परिचालन गतिविधियों से कुल आय का लगभग 20 प्रतिशत प्राप्त होता है। इसके बावजूद यात्रियों का आरोप है कि राजस्व बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है, जबकि सुविधाओं के विस्तार और सेवा गुणवत्ता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन केवल कमाई का माध्यम नहीं, बल्कि शहर के विकास और अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक निवेश होता है। ऐसे में दिल्ली मेट्रो की प्राथमिकता यात्रियों की सुविधा, नए रूटों का विस्तार और सेवा की गुणवत्ता होनी चाहिए, ताकि राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर के अधिक से अधिक लोगों को तेज, सुलभ और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके।
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