पीएम मोदी 03 जनवरी को भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का करेंगे उद्घाटन

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Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की ग्रैंड इंटरनेशनल प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरें साझा करके लोगों से यहां आने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि दिल्ली में आयोजित पिपरहवा के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी की कुछ झलकियां यहां प्रस्तुत हैं। संस्कृति और बौद्ध धर्म के प्रति प्रेम रखने वाले सभी लोगों से मैं इस प्रदर्शनी में आने का आह्वान करता हूं।

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Prime Minister Narendra Modi: सुबह 11 बजे से शुरू होगी प्रदर्शनी

यह प्रदर्शनी सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसका टाइटल ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के नेक विचारों को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। यह हमारे युवाओं और हमारी समृद्ध संस्कृति के बीच बंधन को और गहरा करने का भी एक प्रयास है। मैं उन सभी लोगों की भी सराहना करना चाहूंगा, जिन्होंने इन अवशेषों को वापस लाने के लिए काम किया।

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राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में होगा कार्यक्रम

उन्होंने लिखा कि 3 जनवरी, इतिहास, संस्कृति और भगवान बुद्ध के आदर्शों के प्रति उत्साही लोगों के लिए एक बहुत ही खास दिन है। सुबह 11 बजे भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी, ‘द लाइट एंड द लोटस: द अवेकन्ड वन’ के अवशेष का उद्घाटन दिल्ली में राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में किया जाएगा। उन्होंने लिखा, एक सदी से भी ज्यादा समय के बाद वापस लाए गए पिपरहवा के अवशेष। पिपरहवा से प्रामाणिक अवशेष और पुरातात्विक सामग्री जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रह में संरक्षित हैं।

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विभिन्न विषयों के आधार पर होगी प्रदर्शनी

प्रदर्शनी को अलग-अलग विषयों के आधार पर सजाया गया है। इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित मॉडल रखा गया है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों के प्रामाणिक अवशेष और स्वदेश वापस लाए गए रत्न एक साथ प्रदर्शित किए गए हैं। अन्य खंडों में पिपरहवा रिविजिटेड, बुद्ध के जीवन की झलकियां, ‘मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की कलात्मक भाषा’, सीमाओं के पार बौद्ध कला और विचारों का विस्तार तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी: निरंतर प्रयास शामिल हैं।

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