Barapullah : बारापुला फेज-3 के शुरू होने के बाद सामने आ रही ट्रैफिक समस्या को लेकर दिल्ली सरकार ने पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की प्लानिंग और डिजाइन पर सवाल उठाए हैं। इस बारे में दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि परियोजना में ट्रैफिक इंटीग्रेशन और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखने में कमी रही, जिसके कारण कुछ स्थानों पर ट्रैफिक मर्ज होने से स्थिति बिगड़ गई। मौजूदा सरकार अब यातायात संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बारापुला फेज-3 का उद्देश्य मयूर विहार, सराय काले खां और दक्षिण दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना था। परियोजना को वर्ष 2014 में मंजूरी मिली थी और अप्रैल 2015 में निर्माण शुरू हुआ था। इसे वर्ष 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पेड़ों की अनुमति, यूटिलिटी शिफ्टिंग समेत विभिन्न कारणों से परियोजना वर्षों तक लंबित रही। मंत्री ने कहा कि पिछली आप सरकार के कार्यकाल में परियोजना की प्लानिंग, डिजाइन और कई महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन संबंधी फैसले लिए गए। उनके अनुसार, बारापुला को केवल एक एलिवेटेड कॉरिडोर के तौर पर नहीं, बल्कि डीएनडी फ्लाईवे, एनएच-24, रिंग रोड, सराय काले खां, आरआरटीएस तथा आसपास के रेलवे और मेट्रो नेटवर्क से जुड़े एक इंटीग्रेटेड ट्रैफिक नेटवर्क के रूप में देखा जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समस्या का समाधान केवल सड़क या एलिवेटेड कॉरिडोर में बदलाव से नहीं होगा। लेन चैनलाइजेशन, मर्जिंग प्वाइंट और अलग-अलग दिशाओं से आने वाले ट्रैफिक के बेहतर वितरण पर भी काम करना होगा। पीडब्ल्यूडी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर तत्काल उपायों पर काम कर रहा है।
640 करोड़ के भुगतान पर भी सवाल
वहीं पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बारापुला फेज-3 से जुड़े वित्तीय फैसलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आर्बिट्रेशन के माध्यम से ठेकेदार को करीब 640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि परियोजना में देरी, बढ़ी लागत और आर्बिट्रेशन से जुड़े मामलों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने बताया कि स्थानीय ट्रैफिक को राहत देने के लिए रिंग रोड पर गुरुद्वारे के सामने डेडिकेटेड यू-टर्न की संभावना भी देखी जा रही है। इससे सिद्धार्थ एक्सटेंशन के लोगों को ओल्ड बारापुला की ओर सीधे जाने और आगे लाजपत नगर, आईएनए तथा एम्स की तरफ जाने में सुविधा मिल सकती है।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य अब आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर दिल्ली के लोगों को तत्काल राहत देना है। ट्रैफिक और स्ट्रक्चरल डिजाइन विशेषज्ञ से पूरे कॉरिडोर का व्यापक आकलन कराया जाएगा और शॉर्ट टर्म के साथ स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा, ताकि आने वाले वर्षों में भी बारापुला पर यातायात सुचारु बना रहे।
भाजपा सरकार सत्ता में आते ही करवाया था निरीक्षण
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के फरवरी 2025 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने बारापुला फ्लाईओवर का निरीक्षण किया था। उस समय तक परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था। उन्होंने बताया कि फ्लाईओवर के लिए कुल 298 पिलर बनाए जाने थे, जिनमें से 288 पिलर यानी करीब 80 प्रतिशत काम भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले ही पूरा हो चुका था। परियोजना की लागत और भुगतान का जिक्र करते हुए वर्मा ने कहा कि 2014-15 में इसकी शुरुआती अनुमानित लागत 1,057 करोड़ रुपये थी। बाद में निर्माण कंपनी ने 964 करोड़ रुपये की निविदा पेश की। काम 28 अप्रैल 2015 को शुरू हुआ था और इसे 30 महीने में यानी 27 अक्टूबर 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन परियोजना में करीब नौ साल की देरी हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में देरी के कारण सरकारी और करदाताओं के पैसे की बड़ी राशि खर्च हुई। मंत्री के मुताबिक, भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले ठेकेदार को 36.66 करोड़ रुपये की पहली लागत वृद्धि और 39.85 करोड़ रुपये की दूसरी लागत वृद्धि का भुगतान किया गया। इसके बाद ठेकेदार ने अनुबंध में मौजूद मध्यस्थता प्रावधान के तहत मामला उठाया और 29 सितंबर 2021 को उसे 44 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया।


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