High Court Ruling on Rape: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को रेप आरोपी की जमानत यह कहते हुए खारिज कर दी कि पीड़िता से शादी करने से रेप का अपराध कम नहीं हो जाता। आरोपी पर एक लॉ स्टूडेंट से रेप करने का आरोप है, जब वह नाबालिग थी। हांलाकि फरवरी में आरोपी ने पीड़िता से शादी कर ली थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित से शादी कर लेने से आरोपी, नाबालिग के साथ बार-बार रेप करने के अपराध से बरी नहीं हो जाता। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि साफ़ तौर पर, आरोपी ने शादी सिर्फ़ खुद को ज़मानत पर बाहर निकालने की एक चाल के तौर पर की थी, जबकि उसने एक नाबालिग लड़की के साथ बार-बार रेप किया था, जैसा कि लड़की ने एफआईआर और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए अपने बयान में आरोप लगाया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी को हिरासत से बाहर निकालने के लिए लड़की द्वारा दिए गए बयान पर भी सवाल उठाया। लड़की ने कहा था कि उसे एफआईआर की बातों के बारे में पता नहीं था, क्योंकि शिकायत उसके वकील ने लिखी थी। कोर्ट ने कहा कि इस बात पर यकीन नहीं किया जा सकता कि एक लॉ स्टूडेंट होने के बावजूद, उसे एफआईआर की बातों के बारे में पता नहीं था, खासकर तब जब शिकायत अंग्रेज़ी से हिंदी में बदली गई थी। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने आरोपी और पीड़ित के बर्ताव को देखते हुए आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी।
क्या था मामला?
आरोपी को 2024 में जामिया नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि पीड़ित की मुलाक़ात आरोपी से सोशल मीडिया पर हुई थी और वे दोस्त बन गए थे। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़ित के साथ शारीरिक संबंध बनाए और दो बार उसका गर्भपात भी करवाया। हालांकि, जब वह बालिग हो गई, तो उसने उससे शादी करने से मना कर दिया। हांलाकि बाद में गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने फरवरी 2026 में पीड़िता से शादी कर ली। कोर्ट ने कहा कि बेशक, रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के अनुसार आरोपी ने निकाहनामे के ज़रिए पीड़िता से शादी कर ली। लेकिन इससे आरोपी अपने बार-बार किए गए रेप के कृत्यों से बरी नहीं हो जाता। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपी और पीड़िता के बीच यौन संबंध शुरू हुए थे, तब पीड़िता की उम्र सिर्फ़ 16 साल थी, और जब वह 2024 में बालिग हुई, तो आरोपी ने उससे शादी करने से मना कर दिया, जिसके कारण यह एफआईआर दर्ज हुई।”
जेल से बाहर आने के लिए आरोपी ने की पीड़िता से शादी
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के गिरफ्तार होने और जेल में होने के बाद ही वह उससे शादी करने को राज़ी हुआ। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक ने भी ज़मानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि कि पीड़िता कोई अनपढ़ व्यक्ति नहीं है, बल्कि कानून की छात्रा है, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि उसे अपनी शिकायत की बातों की जानकारी नहीं थी। राज्य की ओर से एपीपी ने यह भी दलील दी कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें ट्रायल कोर्ट के सामने पीड़िता की गवाही को देखते हुए पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करने की ज़रूरत है। ऐसे मामलों में ज़मानत देने से इस तरह की कानून-व्यवस्था की अनदेखी को बढ़ावा मिलेगा और लोग बिना किसी डर के ऐसा करते रहेंगे।
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