Delhi Assembly : दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की संसदीय स्वतंत्रता का उद्घोष देश की आजादी से बहुत पहले ही हो चुका था। वीर विठ्ठलभाई पटेल ने औपनिवेशिक शासन के दौरान विधायिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पीठासीन पद की गरिमा को स्थापित कर भारतीय संसदीय परंपराओं को नई दिशा दी। उनकी विरासत आज भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। विजेंद्र गुप्ता गुरुवार को वीर विठ्ठलभाई पटेल की 93वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ऐतिहासिक पुराने सचिवालय में आयोजित स्मृति कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान चेतना’ के विशेष अंक ‘वीर विठ्ठलभाई पटेल स्मरणांजलि अंक’ का विमोचन किया और उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, वरिष्ठ अधिकारी, विशिष्ट अतिथि और युवा संपर्क कार्यक्रम के तहत पहुंचे स्कूली विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संसदीय स्वतंत्रता के प्रमुख शिल्पकार थे पटेल
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वीर विठ्ठलभाई पटेल भारतीय संसदीय परंपराओं के प्रमुख शिल्पकारों में शामिल थे। उनके निर्भीक नेतृत्व ने विधायी कार्यवाही में निष्पक्षता, प्रक्रियागत अनुशासन और संस्थागत स्वतंत्रता की मजबूत नींव रखी। उन्होंने संसदीय प्रक्रियाओं पर अपनी गहरी पकड़ के माध्यम से ब्रिटिश प्रशासन को विधायिका के समक्ष जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटेल ने यह सिद्ध किया कि सदन के अध्यक्ष का पद राजनीतिक दबाव से ऊपर रहकर निष्पक्षता के साथ कार्य करने का प्रतीक है। गुप्ता ने कहा कि बॉम्बे नगर निगम के महापौर से केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष तक पटेल की यात्रा औपनिवेशिक भारत में लोकतांत्रिक चेतना के विकास की कहानी बयां करती है। 27 सितंबर 1873 को जन्मे पटेल का 22 अक्टूबर 1933 को जिनेवा में निधन हुआ। उन्होंने जनसेवा, संवैधानिक निष्ठा और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति समर्पण की अमिट विरासत छोड़ी।
पुराने सचिवालय से जुड़ा है ऐतिहासिक रिश्ता
गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1912 में निर्मित पुराना सचिवालय भारत की प्रारंभिक केंद्रीय विधायिका का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। विठ्ठलभाई पटेल वर्ष 1918 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में शामिल हुए और 1924 तथा 1926 में केंद्रीय विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए। उन्होंने 1925 से 1930 तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। जिस ऐतिहासिक भवन में आज दिल्ली विधानसभा संचालित होती है, वहां पटेल ने संसदीय स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।


Download Android App
Download iOS App




