Jantar Mantar violence : कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से 20 जुलाई को दिए गए ‘संसद मार्च’ के आह्वान के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में हुई हिंसा की पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े मामलों में नई दिल्ली जिले के पांच थानों में 25 जुलाई तक कुल 21 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें सबसे अधिक मामले संसद मार्ग थाना क्षेत्र में दर्ज किए गए, जबकि दूसरे स्थान पर कनॉट प्लेस थाना है। इसके अलावा मंदिर मार्ग, बाराखंबा रोड और कर्तव्य पथ थाने में भी एक-एक एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर रद्द करने के विषय पर पुलिस अधिकारी अभी भी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि उन्होंने इतना स्पष्ट कर दिया है कि हिंसा के पीछे मंझे हुए बदमशों के चेहरे पुलिस के सामने आए हैं। जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, डकैती, बलात्कार, नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म जैसी संगीन वारदातों में शामिल लोग थे। ये न तो छात्र थे और न ही प्रदर्शनकारी थे, बल्कि पिछले कुछ सप्ताह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा प्रदर्शन ऐसे ही बदमाशों की वजह से हिंसक हुआ। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो ऊपर से एफआईआर रद्द करने का आदेश आता है तो पुलिस छात्रों को तो कुछ नहीं कहेगी, लेकिन ऐसे बदमाशों को बिल्कुल नहीं छोड़ेगी। सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसे लोगों को छोड़ा गया तो एक गलत उदाहरण सेट हो जाएगा।
दंगा समेत छेड़छाड़ और चोरी की एफआईआर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिंसा केवल 20 जुलाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि प्रदर्शन समाप्त होने वाले दिन 25 जुलाई तक अलग-अलग समय और जगह पर हिंसा देखने को मिली थी। इस दौरान पथराव, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, चोरी, महिलाओं से छेड़छाड़ और अन्य आपराधिक घटनाएं सामने आईं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब आधा दर्जन एफआईआर आम नागरिकों की शिकायत पर दर्ज की गई हैं, जिनमें सीसीटीवी कैमरों की चोरी और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले प्रमुख हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिलाओं से छेड़छाड़ के दो मामले और सीसीटीवी कैमरे चोरी होने के दो मामले दर्ज किए गए हैं। एक मामले में सीसीटीवी चोरी कर ले जाते हुए बाइक सवार तीन युवक एक वायरल वीडियो में देखे गए हैं। फुटेज में बाइक का नंबर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में असामाजिक और आपराधिक तत्व छात्रों के बीच सक्रिय थे। इनका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान पैदा हुई अफरा-तफरी का फायदा उठाकर चोरी, महिलाओं से छेड़छाड़ और अन्य अपराध करना था। जांच में मोबाइल फोन चोरी, पर्स चोरी और सीसीटीवी कैमरे चोरी होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में किसी व्यक्ति द्वारा ड्रोन उड़ाए जाने की भी जानकारी मिली है। चूंकि यह इलाका ‘नो-फ्लाइंग जोन’ में आता है, इसलिए बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना कानून का उल्लंघन माना जाता है। इस संबंध में भी एक केस दर्ज है और जांच की जा रही है।
निजी शिकायत पर दर्ज एफआईआर नहीं हो सकेगी रद्द
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यदि भविष्य में सरकार या सक्षम स्तर से निर्देश मिलते हैं तो पुलिस द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए दर्ज केस वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मगर जिन मामलों में शिकायतकर्ता आम नागरिक हैं, विशेषकर छेड़छाड़ और किसी पर कातिलाना हमला जैसे अपराध उन्हें वापस लेना सरल नहीं होगा, क्योंकि ऐसे मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग होगी।
पहले ही दिन सबसे अधिक एफआईआर
सूत्रों के अनुसार गत 20 जुलाई को हिंसा वाले दिन ही करीब 13 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जबकि शेष आठ एफआईआर अगले चार से पांच दिनों के दौरान दर्ज की गई हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि 25 जुलाई को प्रदर्शन समाप्त होने के दिन भी कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस बल पर पथराव किया था, लेकिन पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। जांच के दौरान पुलिस ने अब तक प्रदर्शन में शामिल 2,873 संदिग्ध चेहरों का सत्यापन किया है। इनमें से 989 लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि होने की पुष्टि हुई है। पुलिस के अनुसार, इन व्यक्तियों पर हत्या, डकैती, लूट, झपटमारी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर केस पहले से दर्ज हैं। अधिकारियों का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बनाने में ऐसे ही संगठित आपराधिक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



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