IP University : गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपी यूनिवर्सिटी) की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तीन कार्यक्रमों में विशेष प्रवेश परीक्षा (एसईटी) आयोजित किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद एवं कोर्ट सदस्य अमन कुमार ने दिल्ली के उपराज्यपाल एवं आईपी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति तरणजीत सिंह संधू को शिकायत भेजकर इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली प्रोफेशनल कॉलेजेज या इंस्टीट्यूशंस (प्रोहिबिशन ऑफ कैपिटेशन फीस, रेगुलेशन ऑफ एडमिशन, फिक्सेशन ऑफ नॉन-एक्सप्लॉइटेटिव फीस एंड अदर मेजर्स टू एंश्योर इक्विटी एंड एक्सीलेंस) एक्ट, 2007 में ‘स्पेशल एंट्रेंस टेस्ट’ (एसईटी) का कोई प्रावधान नहीं है। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिनियम के तहत नामित एजेंसी को कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) और उसके बाद केंद्रीकृत काउंसलिंग के माध्यम से एकल खिड़की प्रणाली के तहत मेरिट आधारित प्रवेश कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
अमन कुमार ने दावा किया है कि आईपी यूनिवसिर्टी द्वारा द्वारा बीएड (कोड 122), बीएड (स्पेशल एजूकेशन) (कोड 159) और बीए (जेएमसी) (कोड 126) में विशेष प्रवेश परीक्षा कराने का फैसला कानून के प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना है कि एक ही प्रवेश प्रक्रिया में दोबारा सीईटी कराने को केवल उसका नाम बदलकर एसईटी नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला
शिकायत में दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित डब्ल्यूपी (सी) 11920/2026 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 18 अगस्त 2026 को अदालत ने आदेश दिया था कि 14 अगस्त 2026 की विवादित अधिसूचना के आधार पर किए जाने वाले प्रवेश याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2 सितंबर 2026 को जारी विशेष प्रवेश परीक्षा संबंधी नोटिस में हाईकोर्ट के उक्त आदेश का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। उनका दावा है कि इससे अदालत के आदेशों की अवहेलना को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों पर आईपी यूनिवर्सिटी का पक्ष सामने आना बाकी है।
दाखिला प्रक्रिया में भ्रम का आरोप
अमन कुमार ने इस वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया में बार-बार जारी किए गए नोटिसों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त को विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन काउंसलिंग का अंतिम राउंड होने की सूचना दी थी, जबकि 8 अगस्त को ऑफलाइन काउंसलिंग के संबंध में अलग नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 14 अगस्त को सेकेंड स्पॉट ऑनलाइन काउंसलिंग का नोटिस जारी किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अलग-अलग चरणों में जारी इन सूचनाओं के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑफलाइन काउंसलिंग के दौरान कुछ ऐसे सीयूईटी अभ्यर्थियों को भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया, जो निर्धारित समय सीमा में पंजीकरण नहीं करा पाए थे।
दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए 85 प्रतिशत सीटों का मुद्दा
शिकायत में दिल्ली प्रोफेशनल कॉलेजेज या इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2007 की धारा 12 का हवाला देते हुए दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित 85 प्रतिशत सीटों के मुद्दे को भी उठाया गया है। अमन कुमार का आरोप है कि दाखिला प्रक्रिया में कथित कठोरता के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों के कॉलेजों का रुख करना पड़ा, जिससे दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सीटों का समुचित लाभ नहीं मिल सका।
उन्होंने उपराज्यपाल से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की पूरी प्रवेश प्रक्रिया की जांच कराने, नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और विशेष प्रवेश परीक्षा के आयोजन के फैसले की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। शिकायत की प्रतियां दिल्ली के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, प्रवेश नियामक समिति के अध्यक्ष और आईपी विश्वविद्यालय के कुलपति को भी भेजी गई हैं।


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