कहीं राहत, कहीं आफत

Summary :

रानी झांसी फ्लाईओवर अपने शुरुआती दौर से ही चार्चा में रहा है। यह फ्लाईओवर करीब 175 करोड़ रुपए की लागत से 22 महीने में ही 2010 में बन जाना चाहिए था।

नई दिल्ली : रानी झांसी फ्लाईओवर अपने शुरुआती दौर से ही चार्चा में रहा है। यह फ्लाईओवर करीब 175 करोड़ रुपए की लागत से 22 महीने में ही 2010 में बन जाना चाहिए था। मगर डेड लाइन के साथ इसका बजट भी बढ़ता रहा। आखिरकार गत 16 अक्टूबर को इस फ्लाई ओवर का उद्घाटन कर जनता को समर्पित कर दिया गया।

मगर फ्लाई ओवर के बनने के बाद भी लोगों को पूरी तरह से राहत नहीं मिली है। फ्लाईओवर बनने के बाद कुछ जगहों पर जाम से राहत मिली तो कुछ जगहों पर जाम लगने लगा है। इसके अलावा कई प्वाइंटों पर डार्क स्पोट बन गए हैं, जो हादसों को निमंत्रण दे रहे हैं। पंजाब केसरी की टीम ने फ्लाईओवर रूट का जायजा लिया और लूज प्वाइंटों को कैमरे में कैद भी किया।

फ्लाईओवर खत्म जाम शुरू… फ्लाईओवर बनने से यहां जाम से राहत मिली है। मगर कई बार पीक टाइम में फ्लाईओवर के अंतिम छोर पर जाम लग जाता है। खासतौर से फिल्मिस्तान से तीस हजारी की ओर आते वक्त जब फ्लाई ओवर से उतरते हैं तो लोगों को जाम से जुझना पड़ता है। यहां जाम का बड़ा कारण। फ्लाई ओवर खत्म होते ही करीब 250 मीटर के दायरे में दो ट्रैफिक सिग्नल्स का होना है। जहां से लोग सड़क पार करतें हैं और टर्न लेते हैं। जिसकी वजह से पीछे का ट्रैफिक स्लो हो जाता है।

श्राद्ध के बाद आम जनता के लिए खुलेगा रानी झांसी रोड फ्लाईओवर

– वसीम सैफी

Desk Team