देशभर के कई कोनों में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर साफ़ दिखाई दे रहा है। फ्रांस के बाद अब जर्मनी में भी युवा महंगाई और शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। ‘जेन जेड रेगेल्ट’ ग्रुप द्वारा बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख समेत 34 शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शन से सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। आइए जानते हैं, क्या है Gen Z Regelt Protest और युवाओं की मांग।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
- जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, फिर भी वहां के युवा महंगाई से परेशान हैं।
- युवा स्कूलों की हालत सुधारने और मेंटल हेल्थ सेवाओं के लिए ज्यादा बजट मांग रहे हैं।
- इसके अलावा, युवा सरकार की उस योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत सेना का दायरा बढ़ाने और अनिवार्य सैन्य सेवा लाने की बात है।
धीरे-धीरे हिंसक हुआ प्रदर्शन
जर्मनी के लगभग 34 शहरों में इस आंदोलन के तहत प्रदर्शन आयोजित किए गए। राजधानी बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख जैसे प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतरे। पहले प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन शाम होते-होते फ्रैंकफर्ट, बर्लिन, हैम्बर्ग और कोलोन जैसे बड़े शहरों में हालात बिगड़ने लगे। कुछ नकाबपोश उपद्रवियों ने कई दुकानों और स्टोर्स में तोड़फोड़ और लूटपाट की। इसके बाद प्रदर्शन हिंसक होने लगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस और आपातकालीन सेवाओं पर पत्थर, आतिशबाजी और पेट्रोल बम फेंके।
प्रदर्शन में करीब 100 कट्टर वामपंथी लोग घुसे
प्रशासन और स्थानीय मंत्रियों का कहना है कि फ्रैंकफर्ट के प्रदर्शनों में करीब 100 कट्टर वामपंथी लोग घुस आए थे, जिन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसा में बदल दिया।
वहीं ‘Gen Z रेगेल्ट’ आंदोलन के आयोजकों ने हिंसा से दूरी बनाते हुए कहा है कि उनके प्रदर्शन में ऐसी हरकतों के लिए कोई जगह नहीं है।
क्या है ‘Gen Z Regelt’ आंदोलन?
जर्मनी में युवा ग्रुप ‘Gen Z regelt’ ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस कैंपेन का का उद्देश्य नेताओं का ध्यान युवाओं की उन समस्याओं की ओर खींचना है, जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।


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