एक नवंबर से BS-IV श्रेणी के वाहनों के प्रतिबंध से दिल्ली की सप्लाई चेन चरमराने की आशंका

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Delhi News : दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की आहट के बीच प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर लगने वाले प्रतिबंधों का मामला गरमा गया है। एक नवंबर से दिल्ली में बीएस-IV श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम के फैसले को परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा ने सिरे से नकार दिया है। दिल्ली परिवहन विभाग में उपायुक्त रहे अनिल छिकारा ने इस नीति को अवैज्ञानिक व तर्कों से दूर महज एक काल्पिक शॉर्टकट करार दिया, जिससे प्रदूषण तो कम नहीं होगा, लेकिन आम जनता और व्यापारियों की कमर जरूर टूट जाएगी। परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा ने…

Delhi News : दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की आहट के बीच प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर लगने वाले प्रतिबंधों का मामला गरमा गया है। एक नवंबर से दिल्ली में बीएस-IV श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम के फैसले को परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा ने सिरे से नकार दिया है। दिल्ली परिवहन विभाग में उपायुक्त रहे अनिल छिकारा ने इस नीति को अवैज्ञानिक व तर्कों से दूर महज एक काल्पिक शॉर्टकट करार दिया, जिससे प्रदूषण तो कम नहीं होगा, लेकिन आम जनता और व्यापारियों की कमर जरूर टूट जाएगी।

परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा ने कहा कि इस प्रतिबंध का दायरा बहुत बड़ा है, जिससे दिल्ली व एनसीआर के लाखों वाहन चालक प्रभावित होंगे। पिछले वर्षों में पंजीकृत बीएस-IV गाड़ियों व एनसीआर व अन्य राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक और निजी वाहनों साथ में टू व्हीलरों व अन्य वाहनों को मिलाकर लगभग 50 लाख वाहन इस प्रतिबंध की सीधी चपेट में आएंगे। यह भारी-भरकम रोक दिल्ली की पूरी सप्लाई चेन को चरमरा देगी।

इसके साथ ही नौकरी, रोजगार, व्यापार व दैनिक आजीविका के सिलसिले में रोजाना एनसीआर व अन्य पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले कामगारों, नौकरीपेशा लोगों व कारोबारियों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित होगा। जब पड़ोसी क्षेत्रों से वाहनों का मूवमेंट ही प्रतिबंधित हो जाएगा, तो इसका सीधा व बेहद नकारात्मक असर दिल्ली के कुल व्यापार और तमाम आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा। हालांकि दिल्ली में जो बीएस-IV श्रेणी के वाहन हैं, उनके चलने की अनुमति होगी। दिल्ली से बाहर के वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार व सीएक्यूएम द्वारा बीएस-IV वाहनों को प्रतिबंधित करने के पीछे का तर्क लैबोरेटरी के मास-इमीशन टेस्ट पर आधारित है।

लैब सेटिंग्स में इंजन को पीक लोड (अत्यधिक भार, तीव्र गति या पहाड़ी ढलानों पर चढ़ाई) की चरम स्थितियों में परखा जाता है। जहां बीएस-VI इंजनों के उन्नत आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम बेहतर आंकड़े दिखाते हैं लेकिन अनिल छिकारा ने तकनीकी पहलू रखते हुए स्पष्ट किया है कि दिल्ली की भौगोलिक व व्यावहारिक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने बताया कि असल प्रदूषण टेल पाइप से निकलने वाला धुआं है, जो बीएस 4 और बीएस 6 दोनों में एक जैसा ही होता है। सरकार को केवल उन्हीं वाहनों को रोकना चाहिए जिनसे प्रदूषित धुआं निकलता है,इसके लिए बार्डरों पर टेल पाइप चेक करने की मशीन लगाई जा सकती है।

Sumant Chaudhary