Delhi LG News : दिल्ली में विकास कार्यों की योजना, निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जिला विकास समिति (डीडीसी) और शीर्ष समिति के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। 15 नवंबर 1999 को लागू किए गए मूल ढांचे में संशोधन के बाद अब व्यवस्था दिल्ली के मौजूदा 13 राजस्व जिलों के अनुरूप होगी। इसके तहत डीडीसी की संख्या नौ से बढ़ाकर 13 कर दी गई है। पुनर्गठित व्यवस्था में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भी शीर्ष समिति में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव को समिति का स्थायी सदस्य बनाया गया है। दिल्ली में सड़कों, फ्लाईओवर और अन्य प्रमुख सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पीडब्ल्यूडी की प्रमुख भूमिका को देखते हुए इस बदलाव को अहम माना जा रहा है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मौके पर काम की निगरानी को एक ही व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली शीर्ष समिति में सभी कैबिनेट मंत्री, 13 जिला विकास समितियों के अध्यक्ष, मुख्य सचिव और दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष शामिल होंगे। इसके अलावा वित्त, शहरी विकास, योजना, सामान्य प्रशासन, नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली जल बोर्ड समेत प्रमुख विभागों के प्रशासनिक प्रमुख भी समिति के सदस्य होंगे। दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भी नियमित सदस्य बनाया गया है। राजस्व विभाग के सचिव-सह-मंडलायुक्त को शीर्ष समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। वहीं, व्यवस्था को मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप बनाने के लिए पुराने और अप्रासंगिक पदनाम हटाए गए हैं। इनमें तत्कालीन दिल्ली विद्युत बोर्ड और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का पदनाम शामिल है।
उपराज्यपाल कार्यालय के अनुसार, संशोधित डीडीसी ढांचा दिल्ली में विकेंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी को प्रभावी बनाएगा। इसका उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों, स्थानीय निकायों और विभिन्न सरकारी विभागों को एक साझा मंच पर लाकर उनके बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं और नागरिक शिकायतों के समाधान में भी तेजी लाने पर जोर रहेगा।
विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण विकास परियोजनाओं में होने वाली देरी को कम करना, समयबद्ध तरीके से काम पूरा कराना और लोगों को अधिक जवाबदेह एवं त्वरित सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना इस पुनर्गठन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इससे दिल्ली के सभी 13 जिलों में विकास योजनाओं की जमीनी निगरानी और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।



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