Chandigarh News : दिल्ली-एनसीआर और चंडीगढ़ के रियल एस्टेट मामलों में राहत की उम्मीद लगाए बैठे खरीदारों, बिल्डरों और अन्य पक्षकारों के लिए बड़ी परेशानी सामने आ रही है। दिल्ली में एनसीटी दिल्ली और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) मामलों की अपीलीय सुनवाई के लिए गठित रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल (आरईएटी) में चेयरमैन, ज्यूडिशियल मेंबर तथा टेक्निकल/एडमिनिस्ट्रेटिव मेंबर के तीनों अहम पद फरवरी 2026 से प्रभावी रूप से रिक्त पड़े हैं। इसके चलते ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है और लंबित मामलों में पक्षकारों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि चेयरमैन पद पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति 17 फरवरी 2026 को एनसीटी दिल्ली के उपराज्यपाल के आदेश से की जा चुकी है, लेकिन उन्होंने अभी तक पदभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में नियुक्ति होने के बावजूद ट्रिब्यूनल को नियमित नेतृत्व नहीं मिल पाया है।
इंटरव्यू हुए, नतीजे अब तक नहीं
ट्रिब्यूनल के टेक्निकल/एडमिनिस्ट्रेटिव मेंबर की नियुक्ति के लिए जुलाई 2025 में इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन उसका परिणाम अब तक घोषित नहीं हुआ है। वहीं ज्यूडिशियल मेंबर के पद के लिए जुलाई 2026 में इंटरव्यू आयोजित किए गए, मगर इस पद पर भी चयन प्रक्रिया का परिणाम सामने नहीं आया है। यानी एक ओर पदों को भरने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, दूसरी ओर ट्रिब्यूनल में प्रभावी रूप से काम करने के लिए जरूरी तीनों पदों पर पूर्ण व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
अपील का मंच ही कमजोर तो न्याय कैसे मिलेगा ?
रेरा व्यवस्था का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विवादों का अपेक्षाकृत त्वरित निपटारा करना है। रेरा अथॉरिटी के आदेशों के खिलाफ पक्षकारों के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल महत्वपूर्ण कानूनी मंच है। ऐसे में यदि अपीलीय स्तर पर ही सुनवाई और निर्णय की व्यवस्था प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर उन हजारों पक्षकारों पर पड़ता है, जो अपने मामलों के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल का रुख करते हैं। लंबित मामलों में देरी से खरीदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ बिल्डरों और अन्य पक्षकारों के विवाद भी लंबे खिंच सकते हैं। खासकर मकान, फ्लैट, कब्जा, रिफंड और अन्य रियल एस्टेट विवादों में समय पर अपीलीय राहत नहीं मिलना संबंधित पक्षों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
जल्द हो तीनों नियुक्तियां
ऐसे में मांग उठ रही है कि चेयरमैन को तत्काल पदभार ग्रहण कराया जाए और ज्यूडिशियल तथा टेक्निकल/एडमिनिस्ट्रेटिव मेंबर के चयन परिणाम शीघ्र घोषित कर नियुक्तियां पूरी की जाएं। ट्रिब्यूनल में तीनों पदों पर नियमित नियुक्ति होने के बाद ही दिल्ली-चंडीगढ़ क्षेत्र के रेरा मामलों की अपीलीय सुनवाई सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।
पक्षकारों का कहना है कि रेरा कानून के तहत त्वरित न्याय की भावना तभी पूरी होगी, जब अपीलीय ट्रिब्यूनल स्वयं पूरी क्षमता के साथ काम करे। इसलिए संबंधित प्राधिकरणों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर रिक्त पदों को भरने और ट्रिब्यूनल को पूरी तरह सक्रिय करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।



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