Jantar Mantar : कॉकरोज जनता पार्टी (सीजेपी) का 20 जून से चल रहा प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। मगर अचानक ‘संसद मार्च’ कॉल के बाद 20 जुलाई से इस प्रदर्शन का बेहद हिंसक रूप देखने को मिला। कई जगह पथराव, पुलिस व अर्द्धसैनिक बल के जवानों पर हमला किया गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो इस प्रदर्शन को पीछे से लगातार लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल रहा है। जंतर-मंतर तक भीड़ पहुंचाने के लिए फ्री ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था, देश के अलावा दुबई, बांग्लादेश व अन्य देशों से प्रदर्शनकारियों के लिए खाने की फ्री डिलीवरी और जंतर-मंतर पर ‘बांग्लादेश-नेपाल बना देंगे’ जैसे नारों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन के पीछे इतने बड़े स्तर पर लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ विदेशी फंडिंग की भी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि पीछे से फंडिंग के बिना इतना बड़ा आंदोलन चलाना संभव नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस और देश की अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस आंदोलन को सुनियोजित तरीके से किसने भड़काया और लॉजिस्टिक सपोर्ट (परिवहन, खाना व अन्य फ्री सुविधाएं) किसने मुहैया कराईं। विदेशी फंडिंग का पता लगाने के लिए ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया नेटवर्क्स की गहन जांच की जा रही है। पुलिस विदेशी फंडिंग (पाकिस्तान, बांग्लादेश, खालिस्तानी संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन) को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है कि क्या यह प्रदर्शन प्रायोजित था?
झूठी अफवाहों से देश का माहौल गरमाया
दिल्ली पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान झूठे पोस्ट की वजह से जंतर-मंतर और देश में माहौल गर्म हो गया था। पुलिस इसके पीछे पाकिस्तान-बांग्लादेश से फैलाए गए सभी फर्जी पोस्ट भी देख रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय उन संदिग्ध हैंडल्स की जांच जारी है, जिनके जरिए कथित तौर पर भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई। कुछ अकाउंट्स पाकिस्तान-बांग्लादेश से संचालित होने की बात सामने आई है। इन हैंडल्स से यह दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान सात लोगों की मौत हुई, सैकड़ों लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, देश के अंदर भी कुछ ऐसे सोशल मीडिया हैंडल ट्रेस किए गए हैं, जिनके माध्यम से लगातार भ्रामक और झूठे पोस्ट किए गए। दिल्ली पुलिस लगातार इनका खंडन करती रही। मगर अब पुलिस इस तरह के पोस्ट करने वालों के खिलाफ एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस अब इन पर एफआईआर दर्ज कर लीगल एक्शन भी लेगी।
हिंसा करने वाले छात्र नहीं, बाहरी लोग
पुलिस सूत्रों की मानें तो एक व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ एक ऑनलाइन अभियान कुछ ही दिनों में दिल्ली की सड़कों पर बड़े प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं का कारण बना। कथित तौर पर कहा गया कि छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर हिंसक झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जब हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पकड़े गए लोग छात्र नहीं थे, बल्कि बाहरी लोग थे। इससे भी चौंकाने वाली बात यह थी कि इनमें ज्यादातर लोग दिल्ली से बाहर के थे। ऐसे में पुलिस ने हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
सीजेपी संस्थापक का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
गत 20 मार्च को संसद मार्ग और कनॉट प्लेस में हुई हिंसा में दर्ज एफआईआर में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके का भी नाम जुड़ा है। ऐसे में पुलिस ने अभिजीत का रिकॉर्ड खंगालना भी शुरू कर दिया है। पुलिस उनसे जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अभिजीत दीपके हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस डिजिटल जगत से शुरू हुए अभियान के पीछे राजनीतिक व दूसरी देश-विरोधी ताकतों का हाथ तो नहीं। सूत्रों की मानें तो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस दिशा में काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो आखिर क्यों इस आंदोलन को बांग्लादेश और नेपाल के छात्र आंदोलनों से जुड़े पैटर्न के आधार पर चलाया जा रहा है। कहीं इसके पीछे उन आंदोलनों से जुड़े लोगों का सपोर्ट तो नहीं? पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।


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