राष्ट्रीय सुरक्षा और अमित शाह

राष्ट्र की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा किसी भी देश की अखंडता और शांति की प्रतीक है। भारत जैैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्व काफी बढ़ जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ केवल सीमाओं की रक्षा करना नहीं बल्कि देश के नागरिकों, संस्कृति और लोकतंत्र की रक्षा करना भी है। आज के समय में राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने कई नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं। आतंकवाद, साइबर अटैक, सोशल मीडिया ने तकनीकी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राष्ट्र की सुरक्षा सरकारों का दायित्व तो है ही लेकिन यह हर नागरिक का कर्त्तव्य भी है। गृहमंत्री अमित शाह लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की सीमाओं को अभेदय बनाने के लिए लगातार अपने दृढ़ संकल्प को दोहरा रहे हैं। उनका मुख्य फोकस अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक बदलावों को रोकना और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में अमित शाह को राजनीति का चाणक्य तो माना ही जाता है। भाजपा की सफलता की गाथा लिखने में मोदी लहर के साथ-साथ अमित शाह की भी अहम भूमिका रही है। 2019 में भाजपा सत्ता पर दोबारा काबिज हुुई तो मोदी सरकार में अमित शाह को गृहमंत्री का कार्यभार सौंपा गया।
शाह की कुशल रणनीतियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। फक्त चाहे वो पार्टी अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह द्वारा बनाई गईं रणनीति हो या फिर गृह मंत्री रहते हुए उनके ऐतिहासिक निर्णय सभी ने पार्टी को ऊंचाईयां प्रदान की हैं। यही कारण है कि आज शाह पार्टी के सबसे सफल रणनीतिकार माने जाते हैं। आज कुछ गिने-चुने राज्यों को छोड़ दे तो भाजपा ने अधिकतर राज्यों पर कब्जा जमा रखा है। कहीं पार्टी पूर्ण रूप से बहुमत हासिल कर सत्ता में बनी हुई है तो कही भाजपा के समर्थन वाली सरकार सत्ता में है। कई राज्यों में सरकार बनाने में शाह की भमिका काफी महत्वपूर्ण रही है।
एक गृह मंत्री के तौर पर शाह ने देश के लिए कई बड़े निर्णय और साहिसक निर्णय लिये हैं। शाह ने जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 की बेड़ियों से मुक्त कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खात्मे के फैसले के बाद अमित शाह की एक पहचान ऐसे राजनेता के रूप में बन गयी जो कड़े निर्णय लेने की क्षमता रखता है। इसके बाद तो शाह को लेकर यह तक कहा जाने लगे कि उनमें सरदार पटेल की छवि दिखती है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय अमित शाह ने गृह मंत्री बनने के बाद मात्र 2 महीने 5 दिन के भीतर लिया था। शाह के इस फैसले ने जम्मू-कश्मीर का भूगोल पूरी तरह से बदलकर रख दिया। अनुच्छेद-370 हटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर कितना बदल चुका है, यह अब सबके सामने ही है। बैठक में अमित शाह ने सीमा क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में यदि कोई अवैध निर्माण पाया जाता है तो उसे तुरंत जमींदोज किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, अवैध ढांचे या बिना सत्यापन के निर्माण को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्री ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया।
कई दशकों से नक्सलवाद बहुत बड़ा खतरा बना हुआ था। नक्सलवादियों ने लगातार सुरक्षा बलों के जवानों और निर्दोष नागरिकों का खून बहाया। एक के बाद एक नृृशंस नरसंहार किए जिनको याद कर आज भी रूह कांप उठती है। गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में नक्सलवाद की समाप्ति का लक्ष्य तय किया था। उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद की जड़ गरीबी या विकास की कमी नहीं बल्कि यह एक विचारधारा है। उन्होंने 31 मार्च, 2026 की समय सीमा तय की थी। पिछले दो वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों को फ्री हैंड दिया गया आैर उन्हें आधुनिकतम टैक्नॉलोजी और बेहतर सुविधाएं दी गईं। सुरक्षा बलों में तालमेल स्थापित कर कुशल रणनीति तैयार की गई और नक्सलवादियों के गढ़ों में जहां तक कि जंगल के भीतर भी सूचना तंत्र तैयार किया गया। 2 वर्षों में अनेक नक्सली सरगना मारे गए। बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुुईं। नक्सली संगठन छिन्न-भिन्न हुए तो हजारों ने आत्मसमर्पण कर दिया। अब नक्सलियों का कैडर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और नक्सल प्रभावित इलाकों में जहां कभी अंधकार था वहां विकास की रोशनी पहुंच चुकी है। देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल ने कहा था कि यदि हैदराबाद भारत में शामिल नहीं हुआ तो वह भारत के पेट में कैंसर बन जाएगा। पटेल की दूरदृष्टि, सोच-विचार और दृढ़ निर्णय लेने की क्षमता को आज भी लोग याद करते हैं।
गृहमंत्री अमित शाह ने भी अपनी दूरदृष्टि और निर्णय लेने की क्षमता को साबित कर ​िदखाया। अब गृहमंत्री का फोकस अवैध घुसपैठियों को खदेड़ने और जनसांख्यिकी परिवर्तन पर है। इस संबंध में उन्होंने कई नीतिगत निर्णय लिए हैं। डेमोग्राफिक परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए उन्होंने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिये अब खुद बांग्लादेश बॉर्डर की तरफ भागने लगे हैं। पश्चिम बंगाल में शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद अवैध घुसपैठियों में भगदड़ मची हुई है। बीकानेर में उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में गृहमंत्री ने सीमावर्ती जिलों में 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेम वर्क तैयार करने का निर्णय लिया। इस मॉडल के तहत सीमा क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों, ग्राम स्तर के नेटवर्क, पुलिस खुफिया आैर प्रशासनिक अधिकारियों को एकीकृत रूप से जोड़कर सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य किसी भी संदिग्ध गति​ि​वधि की पहचान और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
बोर्ड (सीबीडीटी) तथा राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित रणनीति तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, हवाला कारोबार और आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए सभी एजेंसियों को साझा ऑपरेशन मोड में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल सीमाओं की निगरानी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि अपराध के पूरे नेटवर्क और उसकी आर्थिक जड़ों पर भी प्रहार करना जरूरी है। एक तरफ रक्षा उत्पादन में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ गृहमंत्री सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास दोनाें को प्राथमिकता दे रहे हैं। गृहमंत्री देश को नशा मुक्त बनाने के लिए सशक्त अभियान चलाए हुए हैं। देशवासी यह स्वीकार करते हैं कि बतौर गृहमंत्री अमित शाह बंदे में दम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you human? Please solve:Captcha


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।