Digambara Jain Monk Lifestyle

1. दिशाओं को ही अपना कपड़ा मानना
2. नन्हे जीवों की रक्षा
जैन मुनि अहिंसा को सबसे ऊपर रखते हैं। उनका मानना है कि कपड़ों में पसीने या नमी की वजह से छोटे-छोटे जीव पैदा हो सकते हैं। कपड़े धोने या झाड़ने से उन बेगुनाह जीवों की जान जा सकती है। जीव-हत्या के इस पाप से बचने के लिए ही वे बिना कपड़ों के रहते हैं।
3. बच्चे जैसी सादगी और पवित्रता
जैन शास्त्रों के अनुसार, मोक्ष पाने के लिए मन को एक छोटे बच्चे जैसा साफ होना चाहिए। जैसे एक छोटा बच्चा बिना कपड़ों के भी मासूम और बुराइयों से दूर रहता है, वैसे ही मुनि भी दुनिया के बंधनों को छोड़कर अपनी प्राकृतिक अवस्था में रहते हैं। इसे ‘यथाजात रूप’ यानी जन्म के समय जैसा पवित्र रूप कहा जाता है।
4. शरीर और मन पर काबू पाना
बिना कपड़ों के रहना मन को मजबूत बनाने का एक तरीका है। जैन मुनि खुद को इतना शक्तिशाली बना लेते हैं कि उन्हें न तो कड़ी धूप परेशान करती है और न ही ठंड। यह दिखाता है कि अगर इंसान का मन मजबूत हो, तो वह शरीर की हर तकलीफ को जीत सकता है।
5. किसी भी चीज़ से लगाव न रखना
जैन धर्म में ‘अपरिग्रह’ यानी चीजों को इकट्ठा न करने का बहुत महत्व है। एक सच्चे मुनि का दुनिया की किसी भी चीज़ से मोह नहीं होना चाहिए। अगर वे कपड़े पहनेंगे, तो उन्हें धोने और संभालने की चिंता रहेगी। इस मोह-माया और झंझट से दूर रहने के लिए वे कपड़ों का त्याग कर देते हैं।
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