भीषण गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, जैन मुनि क्यों रहते हैं निर्वस्त्र? वजह जानकर रह जाएंगे दंग

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Digambara Jain Monk Lifestyle: भारत में सभी धर्मों के लोग अपने त्योहार बड़े प्यार और उत्साह से मनाते हैं। इन्हीं में से एक खास पर्व है ‘महावीर जयंती’। जैन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन को बहुत श्रद्धा से मनाते हैं। यह दिन 24वें तीर्थंकर, भगवान महावीर स्वामी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में महावीर जयंती आज 31 मार्च को मनाई जा रही है। जैन धर्म अपनी कठिन तपस्या और अहिंसा के लिए जाना जाता है। आपने देखा होगा कि दिगंबर जैन मुनि कोई भी कपड़ा नहीं पहनते, चाहे मौसम कितना भी ठंडा या गर्म…

Digambara Jain Monk Lifestyle: भारत में सभी धर्मों के लोग अपने त्योहार बड़े प्यार और उत्साह से मनाते हैं। इन्हीं में से एक खास पर्व है ‘महावीर जयंती’। जैन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन को बहुत श्रद्धा से मनाते हैं। यह दिन 24वें तीर्थंकर, भगवान महावीर स्वामी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में महावीर जयंती आज 31 मार्च को मनाई जा रही है।
जैन धर्म अपनी कठिन तपस्या और अहिंसा के लिए जाना जाता है। आपने देखा होगा कि दिगंबर जैन मुनि कोई भी कपड़ा नहीं पहनते, चाहे मौसम कितना भी ठंडा या गर्म क्यों न हो। बहुत से लोग सोचते हैं कि वे ऐसा क्यों करते हैं। दरअसल, इसके पीछे कई बड़े धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं।

Digambara Jain Monk Lifestyle

Digambara Jain Monk Lifestyle
Digambara Jain Monk Lifestyle (Source: Social Media)

1. दिशाओं को ही अपना कपड़ा मानना

‘दिगंबर’ शब्द का मतलब है- वह जिसके लिए दिशाएं (दिक्) ही कपड़ा (अंबर) हों। ये मुनि खुद को किसी एक कपड़े में नहीं बांधते, बल्कि पूरी प्रकृति और आसमान को ही अपना पहनावा मानते हैं। उनके लिए भगवान की बनाई यह कुदरत ही उनका घर और वस्त्र है।

2. नन्हे जीवों की रक्षा

जैन मुनि अहिंसा को सबसे ऊपर रखते हैं। उनका मानना है कि कपड़ों में पसीने या नमी की वजह से छोटे-छोटे जीव पैदा हो सकते हैं। कपड़े धोने या झाड़ने से उन बेगुनाह जीवों की जान जा सकती है। जीव-हत्या के इस पाप से बचने के लिए ही वे बिना कपड़ों के रहते हैं।

3. बच्चे जैसी सादगी और पवित्रता

जैन शास्त्रों के अनुसार, मोक्ष पाने के लिए मन को एक छोटे बच्चे जैसा साफ होना चाहिए। जैसे एक छोटा बच्चा बिना कपड़ों के भी मासूम और बुराइयों से दूर रहता है, वैसे ही मुनि भी दुनिया के बंधनों को छोड़कर अपनी प्राकृतिक अवस्था में रहते हैं। इसे ‘यथाजात रूप’ यानी जन्म के समय जैसा पवित्र रूप कहा जाता है।

4. शरीर और मन पर काबू पाना

बिना कपड़ों के रहना मन को मजबूत बनाने का एक तरीका है। जैन मुनि खुद को इतना शक्तिशाली बना लेते हैं कि उन्हें न तो कड़ी धूप परेशान करती है और न ही ठंड। यह दिखाता है कि अगर इंसान का मन मजबूत हो, तो वह शरीर की हर तकलीफ को जीत सकता है।

5. किसी भी चीज़ से लगाव न रखना

जैन धर्म में ‘अपरिग्रह’ यानी चीजों को इकट्ठा न करने का बहुत महत्व है। एक सच्चे मुनि का दुनिया की किसी भी चीज़ से मोह नहीं होना चाहिए। अगर वे कपड़े पहनेंगे, तो उन्हें धोने और संभालने की चिंता रहेगी। इस मोह-माया और झंझट से दूर रहने के लिए वे कपड़ों का त्याग कर देते हैं।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।