अगस्त के महीने में चीनी का रेट अचानक बढ़ने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गई है और एक समय पर 52 से 55 रुपये तक मिलने वाली चीनी अब 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है और हालात यह है कि भारत को 10 साल बाद विदेश से चीनी आयात करनी पड़ सकती है। चीनी के रेट बढ़ने के बाद एथेनॉल पर चर्चा तेज हो गई वहीं सरकार ने बढ़ती कीमत का कारण गन्ने की फसल खराब होना और बढ़ती मांग का कारण बताया है। जानते है क्यों अचानक कीमत बढ़ी है।
30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल में

चीनी की कीमत बढ़ने के बाद एथेनॉल पर भी चर्चा तेज हो गई है। आपको बता दें कि साल 2025-26 में लगभग 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल में किया गया है और माना जाता है कि यह चीनी के कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। चीनी उत्पादन की बात करें तो इस साल लगभग 306 लाख टन रह सकता है। वहीं एथेनॉल का प्रयोग पेट्रोल में किया जा रहा है और E20 के नाम से पेट्रोल बेचा जा रहा है।
चीनी की कीमत में 20 रुपये का उछाल
देशभर में चीनी की कीमतों में बंपर उछाल आने के बाद लोगों को बढ़ती महंगाई का डर सता रहा है। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो 20 जुलाई 2026 को 1 किलो चीनी का रेट लगभग 50 रुपये के करीब था लेकिन एक महीने बाद 20 अगस्त को चीनी 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई और अब चीनी 65 से 70 रुपये के करीब पहुंच गई है। जिससे माना जा सकता है कि कुछ समय पर चीनी की कीमत लगभग 20 रुपये तक बढ़ गई है और आगे भी बढ़ने का अनुमान हो सकता है।
सरकार बताया कारण
अब सरकार ने बढ़ती कीमतों पर सफाई देते हुए कहा कि इसे एथेनॉल से जोड़ना गलत है क्योंकि इस बार चीनी को एथेनॉल में डायवर्ट करने की हिस्सेदारी घटी है और गन्ने की खराब फसल, अधिक बारिश, जलभराव के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है जिससे उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है और त्यौहार के समय पर चीनी की मांग बढ़ी है जिसके कारण कीमत भी बढ़ी है। वहीं सरकार का कहना है कि देश में अभी चीनी का पूरा स्टॉक मौजूद है।


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