Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas: जहां मूर्ति नहीं, 300 साल पुराने खेजड़ी पेड़ की होती है पूजा; नागौर के इस मंदिर का वो सच जो होश उड़ा देगा

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Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas: राजस्थान के नागौर जिले के मांझवास गांव में फूलां बाई का एक बहुत ही अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि खेजड़ी के पेड़ की पूजा की जाती है। इस मंदिर की दूसरी बड़ी बात यह है कि इसका गुम्बद पूरे नागौर जिले में सबसे ऊंचा है, जो जमीन से 91 फीट ऊपर है। मंदिर के चारों तरफ झरोखों में संगमरमर से बनी भगवानों की 56 मूर्तियां हैं और हर मूर्ति के ऊपर एक छोटा गुम्बद है। मंदिर में आने-जाने के लिए 5 दरवाज़े हैं। इस इलाके के गांवों में कोई भी…

Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas: राजस्थान के नागौर जिले के मांझवास गांव में फूलां बाई का एक बहुत ही अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि खेजड़ी के पेड़ की पूजा की जाती है। इस मंदिर की दूसरी बड़ी बात यह है कि इसका गुम्बद पूरे नागौर जिले में सबसे ऊंचा है, जो जमीन से 91 फीट ऊपर है। मंदिर के चारों तरफ झरोखों में संगमरमर से बनी भगवानों की 56 मूर्तियां हैं और हर मूर्ति के ऊपर एक छोटा गुम्बद है। मंदिर में आने-जाने के लिए 5 दरवाज़े हैं।

इस इलाके के गांवों में कोई भी इंसान शराब नहीं पीता। यहां के लोग नशे के सख्त खिलाफ हैं और आज तक गांव में कभी शराब का ठेका नहीं खुला। हर साल फूलां बाई की बरसी पर एक बड़ा धार्मिक कार्यक्रम होता है, जहां लोग पेड़-पौधों और वन्य जीवों को बचाने तथा नशा न करने की कसम खाते हैं। इस कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने की थी। अब हर साल इसमें शामिल होने के लिए आस-पास के गांवों और दूसरे राज्यों से भी मांझू जाति के लोग आते हैं।

Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas: 300 साल पुराना खेजड़ी का पेड़

यहां एक 300 साल पुराना खेजड़ी का पेड़ है। इसी जगह पर फूलां बाई गोबर के उपले बनाया करती थीं। अब वहां एक चबूतरा बना दिया गया है और लोग इस पेड़ की परिक्रमा करते हैं। फूलां बाई की ‘मांझू’ जाति के नाम पर ही इस गांव का नाम ‘मांझवास’ पड़ा है। गांव में Manjhu Caste Tradition को मानने वाले सभी परिवार खुद को फूलां बाई के परिवार का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के आस-पास कोई भी सिगरेट या नशा नहीं कर सकता क्योंकि गांव वाले नशे के खिलाफ बहुत जागरूक हैं।
इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां फूलां बाई के साथ उनके भाई की भी पूजा होती है। गांव वालों के मुताबिक, फूलां बाई ने शादी नहीं की थी, इसलिए गांव के शादीशुदा लोगों ने आदरवश अपने घर इस खेजड़ी के पेड़ से थोड़ी दूरी पर बनाए हैं। मुख्य मंदिर के अलावा खेजड़ी पेड़ के पास भी एक छोटा मंदिर है, जहां फूलां बाई का वह सितार आज भी सुरक्षित रखा हुआ है, जिसे बजाकर वे भगवान राम के भजन गाया करती थीं।

Best Time to Visit Phoolan Bai Temple: मंदिर दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय

Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas
Nagaur Phoolan Bai Temple Manjhwas (Source: Social Media)

अगर आप भी फूलां बाई मंदिर जाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि साल में दो समय सबसे बढ़िया माने जाते हैं-

  • सर्दियों का मौसम: राजस्थान में गर्मियों में बहुत तेज धूप और गर्मी होती है। इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे आरामदायक और सुहावना रहता है।
  • धर्म सम्मेलन: अगर आप इस गांव की असली संस्कृति, भाईचारे और पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को करीब से देखना चाहते हैं, तो हर साल आयोजित होने वाले धर्म सम्मेलन के समय यहां आएं। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय होता है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।