भारत की वो जगह जहां थम गई हैं समय की सुइयां, आज भी नहीं पहुंच पाया कलयुग! बिना बिजली और मशीनों के रहते हैं लोग

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan: हिंदू धर्म में शास्त्रों के अनुसार, समय को चार युगों में बांटा गया है, जिनमें कलयुग को अंतिम माना जाता है। कलयुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष बताई गई है, जिसमें से अब तक लगभग 5,100 साल बीत चुके हैं। धार्मिक  कथाओं के अनुसार, जिस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीला समाप्त कर देह त्यागा था, उसी समय ‘द्वापर युग’ का अंत हुआ और कलयुग की शुरुआत हो गई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में आज भी एक ऐसी जगह है जहां कलयुग कभी शुरू ही नहीं हुआ।

Kalyug Free Place: वृंदावन का टटिया स्थान

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan (Image: Social Media)
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में एक ऐसी जगह है जिसे ‘टटिया स्थान’ कहा जाता है। जब आप यहां कदम रखेंगे, तो ऐसा महसूस होगा मानो जैसे आप टाइम मशीन में बैठकर हज़ारों साल पीछे चले गए हों। यहां के लोग आज की भागदौड़ भरी दुनिया और आधुनिक मशीनों से पूरी तरह दूर हैं। मान्यता है कि कलयुग की बुराइयां और सारी चमक-धमक इस जगह की सीमाओं के बाहर ही रहती हैं। यहां का रहन-सहन आपको सतयुग जैसी सादगी और शांति का अनुभव कराएगा।

टटिया स्थान का इतिहास

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan (Image: Social Media)

इस पवित्र स्थल का संबंध प्रसिद्ध संत और शास्त्रीय संगीत के सम्राट स्वामी हरिदास जी से है। हरिदास जी को श्री बांके बिहारी जी का परम भक्त माना जाता है। टटिया स्थान वह जगह है जहां स्वामी हरिदास जी के सातवें शिष्य ललित किशोरी जी और उनके अनुयायी ध्यान और साधना किया करते थे। स्वामी हरिदास जी को प्रकृति से बहुत प्रेम था, उन्होंने पक्षियों की चहचहाहट, फूलों की महक और पेड़ों की सरसराहट से ही संगीत की शिक्षा ली थी। इस पूरे क्षेत्र को सुरक्षा के लिए बांस की लकड़ियों (जिसे टटिया कहा जाता है) से घेरा गया था, इसी कारण इसका नाम टटिया स्थान पड़ा।

Tatiya Sthan Vrindavan: सादगी और प्रकृति के बीच जीवन

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan (Image: Social Media)
टटिया स्थान की सबसे बड़ी खासीयत इस जगह की सादगी है। यहां आज भी बिजली का उपयोग नहीं होता। सूर्यास्त के बाद यहां मिट्टी के दीए और लालटेन की रोशनी में काम किया जाता है। यहां के लोग और संत किसी भी मशीन या गैजेट का इस्तेमाल नहीं करते। वे अपने सारे काम हाथों से करते हैं और अपना पूरा समय श्री कृष्ण , गायों और संतों की सेवा में व्यतीत  हैं। यहां की धरती आज भी कच्ची है और पेड़ों को ही भगवान का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र

Tatiya Sthan Vrindavan
Tatiya Sthan Vrindavan (Image: Social Media)

टटिया स्थान में रहने वाले लोगों का अटूट विश्वास है कि आज भी यहां ठाकुर जी साक्षात निवास करते हैं। यहां आने वाले लोग दिखावे की दुनिया को छोड़कर ईश्वर की भक्ति और प्रकृति के करीब रहने को ही जीवन का असली सुख मानते हैं। टटिया स्थान केवल एक जगह नहीं, बल्कि एक ऐसा अहसास है जो हमें सिखाता है कि बिना आधुनिक सुख-सुविधाओं के भी मन की शांति और ईश्वर को पाया जा सकता है। यहां की मिट्टी और हवा में आज भी द्वापर युग जैसी पवित्रता को महसूस किया जा सकता है।

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