Kalyug Free Place: वृंदावन का टटिया स्थान

टटिया स्थान का इतिहास

इस पवित्र स्थल का संबंध प्रसिद्ध संत और शास्त्रीय संगीत के सम्राट स्वामी हरिदास जी से है। हरिदास जी को श्री बांके बिहारी जी का परम भक्त माना जाता है। टटिया स्थान वह जगह है जहां स्वामी हरिदास जी के सातवें शिष्य ललित किशोरी जी और उनके अनुयायी ध्यान और साधना किया करते थे। स्वामी हरिदास जी को प्रकृति से बहुत प्रेम था, उन्होंने पक्षियों की चहचहाहट, फूलों की महक और पेड़ों की सरसराहट से ही संगीत की शिक्षा ली थी। इस पूरे क्षेत्र को सुरक्षा के लिए बांस की लकड़ियों (जिसे टटिया कहा जाता है) से घेरा गया था, इसी कारण इसका नाम टटिया स्थान पड़ा।
Tatiya Sthan Vrindavan: सादगी और प्रकृति के बीच जीवन

स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र

टटिया स्थान में रहने वाले लोगों का अटूट विश्वास है कि आज भी यहां ठाकुर जी साक्षात निवास करते हैं। यहां आने वाले लोग दिखावे की दुनिया को छोड़कर ईश्वर की भक्ति और प्रकृति के करीब रहने को ही जीवन का असली सुख मानते हैं। टटिया स्थान केवल एक जगह नहीं, बल्कि एक ऐसा अहसास है जो हमें सिखाता है कि बिना आधुनिक सुख-सुविधाओं के भी मन की शांति और ईश्वर को पाया जा सकता है। यहां की मिट्टी और हवा में आज भी द्वापर युग जैसी पवित्रता को महसूस किया जा सकता है।
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