कर्नाटक का अद्भुत हरिहरेश्वर मंदिर, जहां एक ही रूप में मिलते हैं शिव और विष्णु

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Karnataka Harihareshwara Temple History: भारत अपनी पुरानी परंपराओं और खूबसूरत मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कर्नाटक के दावणगेरे जिले में एक ऐसा मंदिर है जो अपनी सुंदरता के साथ-साथ भगवान विष्णु और शिव की एकता का संदेश देता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का नाम हरिहरेश्वर मंदिर है। Karnataka Harihareshwara Temple History: एक ही मूर्ति में दो भगवान हरिहरेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद हरिहर की मूर्ति है। इस मूर्ति में भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं। मूर्ति का दाहिना हिस्सा भगवान शिव (हर) का है, जिसमें उनकी जटाएं और त्रिशूल…

Karnataka Harihareshwara Temple History: भारत अपनी पुरानी परंपराओं और खूबसूरत मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कर्नाटक के दावणगेरे जिले में एक ऐसा मंदिर है जो अपनी सुंदरता के साथ-साथ भगवान विष्णु और शिव की एकता का संदेश देता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का नाम हरिहरेश्वर मंदिर है।

Karnataka Harihareshwara Temple History: एक ही मूर्ति में दो भगवान

Karnataka Harihareshwara Temple History
Karnataka Harihareshwara Temple History (Source: Social Media)

हरिहरेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद हरिहर की मूर्ति है। इस मूर्ति में भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं। मूर्ति का दाहिना हिस्सा भगवान शिव (हर) का है, जिसमें उनकी जटाएं और त्रिशूल दिखता है। वहीं बायां हिस्सा भगवान विष्णु (हरि) का है, जिसमें उनके हाथ में शंख, चक्र और सिर पर मुकुट है। यह हमें बताता है कि दुनिया को चलाने वाली और उसे खत्म करने वाली शक्तियां अलग नहीं, बल्कि एक ही हैं।

मंदिर की कहानी

इस मंदिर से जुड़ी एक बड़ी दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि गुहासुर नाम के राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि उसे न तो अकेले शिव मार सकें और न ही अकेले विष्णु। इस वजह से वह बहुत ताकतवर और घमंडी हो गया और सबको परेशान करने लगा। तब दुनिया को बचाने के लिए शिव और विष्णु ने मिलकर ‘हरिहर’ का रूप लिया और तुंगभद्रा नदी के किनारे उस राक्षस का अंत किया।

Karnataka Harihareshwara Temple History: मंदिर का इतिहास

Karnataka Harihareshwara Temple History (1)
Karnataka Harihareshwara Temple History (Source: Social Media)
कर्नाटक के हरिहर शहर में बना यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना (13वीं शताब्दी का) है। इसे 1223-1224 ईस्वी के आसपास होयसल राजा वीर नरसिम्हा द्वितीय के मंत्री पोलाल्वा ने बनवाया था। यह मंदिर ‘होयसल वास्तुकला’ का एक शानदार नमूना है, जहां पत्थरों पर की गई बारीक और सुंदर नक्काशी आज भी पर्यटकों का मन मोह लेती है।
यह मंदिर अपनी शांति और धार्मिक महत्व के कारण लोकप्रिय है, जहां भक्त तुंगभद्रा नदी में स्नान कर मंदिर के दर्शन करते हैं। अगर आप कर्नाटक जाएं तो इस दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।