Chaitra Purnima 2026: आज जरूर पढ़ें चैत्र पूर्णिमा की यह पौराणिक व्रत कथा, तभी पूर्ण होगा व्रत और पूजन

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Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा के दिन को बहुत ही खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और पवित्र नदियों में स्नान करने की पुरानी परंपरा है। यह पर्व खास इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन बजरंगबली का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन किसी पवित्र नदी में स्नान कर व्रत रखने और कथा सुनने से जीवन के समस्त संकट दूर हो जाते हैं। सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए चैत्र पूर्णिमा की यह पौराणिक व्रत कथा का पाठ जरूर करें। Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi: चैत्र पूर्णिमा व्रत की…

Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा के दिन को बहुत ही खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और पवित्र नदियों में स्नान करने की पुरानी परंपरा है। यह पर्व खास इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन बजरंगबली का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन किसी पवित्र नदी में स्नान कर व्रत रखने और कथा सुनने से जीवन के समस्त संकट दूर हो जाते हैं। सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए चैत्र पूर्णिमा की यह पौराणिक व्रत कथा का पाठ जरूर करें।

Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi: चैत्र पूर्णिमा व्रत की कहानी

Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi
Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi (Source: Social Media)

कहानी के अनुसार, एक शहर में एक सेठ और सेठानी रहते थे। सेठानी भगवान विष्णु की बड़ी भक्त थी, लेकिन सेठ को उसकी पूजा-पाठ पसंद नहीं थी। एक दिन नाराज होकर सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया। सेठानी जंगल चली गई, जहां उसे चार आदमी मिट्टी खोदते हुए मिले। उसने उनके यहां काम मांगा।

काम मुश्किल था और सेठानी के हाथों में छाले पड़ गए, इसलिए उन आदमियों ने उसे घर का खाना बनाने का काम दे दिया। वे लोग पहले सिर्फ 4 मुट्ठी चावल खाते थे, लेकिन सेठानी ने उन्हें 8 मुट्ठी लाने को कहा। सेठानी वह चावल पकाती, भगवान विष्णु को भोग लगाती और फिर सबको खिलाती। वह भोजन इतना स्वादिष्ट होता था कि उन आदमियों ने सेठानी से इसका राज पूछा। सेठानी ने बताया कि यह भगवान के प्रसाद का असर है।

वहां दूसरी तरफ, सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा और लोग उसे ताने देने लगे। दुखी होकर सेठ अपनी पत्नी को ढूंढने जंगल निकल पड़ा। उसे भी वही चार आदमी मिले। सेठ उनके यहां काम करने लगा, लेकिन मेहनत न कर पाने के कारण वे उसे भी अपने घर ले आए।

घर पहुंचने पर सेठ ने पत्नी को पहचान लिया, लेकिन सेठानी ने नहीं पहचाना। जब सेठानी सेठ को खाना परोसने लगी, तो साक्षात भगवान विष्णु ने उसका हाथ पकड़ लिया। यह चमत्कार देख चारों भाइयों ने भी दर्शन की इच्छा जताई। सेठानी की प्रार्थना पर भगवान ने सबको दर्शन दिए।

अपनी गलती का अहसास होने पर सेठ ने सेठानी से माफी मांगी। चारों भाइयों ने अपनी मुंहबोली बहन को बहुत सारा धन देकर विदा किया। उसी क्षण से सेठ भगवान विष्णु का भक्त बन गया और पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करने लगा। इसके फलस्वरूप, उसके घर में पुनः सुख-समृद्धि का आगमन हुआ। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा का व्रत करने से भगवान सत्यनारायण और हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम और माता सीता का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।