Chaitra Purnima Vrat Katha Hindi: चैत्र पूर्णिमा व्रत की कहानी

कहानी के अनुसार, एक शहर में एक सेठ और सेठानी रहते थे। सेठानी भगवान विष्णु की बड़ी भक्त थी, लेकिन सेठ को उसकी पूजा-पाठ पसंद नहीं थी। एक दिन नाराज होकर सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया। सेठानी जंगल चली गई, जहां उसे चार आदमी मिट्टी खोदते हुए मिले। उसने उनके यहां काम मांगा।
काम मुश्किल था और सेठानी के हाथों में छाले पड़ गए, इसलिए उन आदमियों ने उसे घर का खाना बनाने का काम दे दिया। वे लोग पहले सिर्फ 4 मुट्ठी चावल खाते थे, लेकिन सेठानी ने उन्हें 8 मुट्ठी लाने को कहा। सेठानी वह चावल पकाती, भगवान विष्णु को भोग लगाती और फिर सबको खिलाती। वह भोजन इतना स्वादिष्ट होता था कि उन आदमियों ने सेठानी से इसका राज पूछा। सेठानी ने बताया कि यह भगवान के प्रसाद का असर है।
वहां दूसरी तरफ, सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा और लोग उसे ताने देने लगे। दुखी होकर सेठ अपनी पत्नी को ढूंढने जंगल निकल पड़ा। उसे भी वही चार आदमी मिले। सेठ उनके यहां काम करने लगा, लेकिन मेहनत न कर पाने के कारण वे उसे भी अपने घर ले आए।
घर पहुंचने पर सेठ ने पत्नी को पहचान लिया, लेकिन सेठानी ने नहीं पहचाना। जब सेठानी सेठ को खाना परोसने लगी, तो साक्षात भगवान विष्णु ने उसका हाथ पकड़ लिया। यह चमत्कार देख चारों भाइयों ने भी दर्शन की इच्छा जताई। सेठानी की प्रार्थना पर भगवान ने सबको दर्शन दिए।
अपनी गलती का अहसास होने पर सेठ ने सेठानी से माफी मांगी। चारों भाइयों ने अपनी मुंहबोली बहन को बहुत सारा धन देकर विदा किया। उसी क्षण से सेठ भगवान विष्णु का भक्त बन गया और पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करने लगा। इसके फलस्वरूप, उसके घर में पुनः सुख-समृद्धि का आगमन हुआ। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा का व्रत करने से भगवान सत्यनारायण और हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम और माता सीता का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यह भी पढ़ें-चैत्र पूर्णिमा की शाम कर लें ये 5 आसान काम! दूर होगी सारी कंगाली, पैसों की होगी बरसात


Download Android App
Download iOS App




