गुरुवार को जरूर करें श्री विष्णु चालीसा का पाठ! हर बाधा होगी दूर और घर में आएगी सुख-समृद्धि

Summary :

Guruwar Ke Upay: सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का माना जाता है कहा जाता है कि इस दिन जो भी भक्त पूरी विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं उनको जीवन में हर तरह के फलों की प्राप्ति होती है माना जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है, उसे जीवन में दरिद्रता व कष्टों का कभी सामना नहीं करना पड़ता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए गुरुवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में आप इस दिन भगवान विष्णु चालीसा करके शुभ फलों की…

Guruwar Ke Upay: सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का माना जाता है कहा जाता है कि इस दिन जो भी भक्त पूरी विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं उनको जीवन में हर तरह के फलों की प्राप्ति होती है माना जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है, उसे जीवन में दरिद्रता व कष्टों का कभी सामना नहीं करना पड़ता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए गुरुवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में आप इस दिन भगवान विष्णु चालीसा करके शुभ फलों की प्राप्ति कर सकते हैं।

Guruwar Ke Upay: गुरुवार के दिन करें ये उपाय

1. पीले रंग का विशेष महत्व

गुरुवार की पूजा में पीले रंग का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह रंग भगवान विष्णु को बहुत पसंद होता है। ऐसे में पूजा के दौरान पीले रंग के कपड़े पहनें और माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। इस दिन नहाने के पानी में हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिए।

2. इस तरह करें केले के पेड़ की पूजा

गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना चाहिए, क्योंकि इसमें भगवान विष्णु का वास होता है। ऐसे में गुरुवार के दिन सबसे पहले केले के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जरूर जलाएं। साथ ही हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। इससे व्रती को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

3. प्रसन्न होंगी धन की देवी

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और उन्हें अपराजिता के फूल अर्पित करें। साथ ही “ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का जप करते रहें।

श्री विष्णु चालीसा (Shri Vishnu Chalisa)

दोहा

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय।

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।

चौपाई

नमो विष्णु भगवान खरारी।

कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।

त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥

सुन्दर रूप मनोहर सूरत।

सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥

तन पर पीतांबर अति सोहत।

बैजन्ती माला मन मोहत॥

शंख चक्र कर गदा बिराजे।

देखत दैत्य असुर दल भाजे॥

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।

काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥

संतभक्त सज्जन मनरंजन।

दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।

दोष मिटाय करत जन सज्जन॥

पाप काट भव सिंधु उतारण।

कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥

करत अनेक रूप प्रभु धारण।

केवल आप भक्ति के कारण॥

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।

तब तुम रूप राम का धारा॥

भार उतार असुर दल मारा।

रावण आदिक को संहारा॥

आप वराह रूप बनाया।

हरण्याक्ष को मार गिराया॥

धर मत्स्य तन सिंधु बनाया।

चौदह रतनन को निकलाया॥

अमिलख असुरन द्वंद मचाया।

रूप मोहनी आप दिखाया॥

देवन को अमृत पान कराया।

असुरन को छवि से बहलाया॥

कूर्म रूप धर सिंधु मझाया।

मंद्राचल गिरि तुरत उठाया॥

शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।

भस्मासुर को रूप दिखाया॥

वेदन को जब असुर डुबाया।

कर प्रबंध उन्हें ढूंढवाया॥

मोहित बनकर खलहि नचाया।

उसही कर से भस्म कराया॥

असुर जलंधर अति बलदाई।

शंकर से उन कीन्ह लडाई॥

हार पार शिव सकल बनाई।

कीन सती से छल खल जाई॥

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।

बतलाई सब विपत कहानी॥

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।

वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥

देखत तीन दनुज शैतानी।

वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।

हना असुर उर शिव शैतानी॥

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे।

हिरणाकुश आदिक खल मारे॥

गणिका और अजामिल तारे।

बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥

हरहु सकल संताप हमारे।

कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे।

दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥

चहत आपका सेवक दर्शन।

करहु दया अपनी मधुसूदन॥

जानूं नहीं योग्य जप पूजन।

होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥

शीलदया सन्तोष सुलक्षण।

विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥

करहुं आपका किस विधि पूजन।

कुमति विलोक होत दुख भीषण॥

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण।

कौन भांति मैं करहु समर्पण॥

सुर मुनि करत सदा सेवकाई।

हर्षित रहत परम गति पाई॥

दीन दुखिन पर सदा सहाई।

निज जन जान लेव अपनाई॥

पाप दोष संताप नशाओ।

भव-बंधन से मुक्त कराओ॥

सुख संपत्ति दे सुख उपजाओ।

निज चरनन का दास बनाओ॥

निगम सदा ये विनय सुनावै।

पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।