Maa Chandraghanta Aarti Lyrics: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है। नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों के दुख और परेशानियां दूर करती हैं। उनकी पूजा करने से साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। इस दिन मां की आरती करने और मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व बताया गया है।
पूरे विधि विधान से नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह स्वरूप शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाती हैं। मां की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली मुश्किलों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें। मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके उन्हें फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा के साथ उनकी आरती करें।
मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में मां चंद्रघंटा को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप भक्तों को बुराई के खिलाफ खड़े होने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि मां की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता आती है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां की पूजा करते समय भक्त अपने परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और तरक्की की कामना करते हैं। इस दिन पूजा के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की मदद करना और दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार रखना भी शुभ माना जाता है।
मां चंद्रघंटा की आरती और मंत्र का महत्व
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आरती पढ़ना शुभ माना जाता है। भक्त मां की आरती के माध्यम से उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। इससे पूजा के प्रति श्रद्धा बढ़ती है और मन एकाग्र होता है।
॥ आरती देवी चन्द्रघण्टा जी की ॥
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।


Download Android App
Download iOS App




