Navratri Day 9 Puja: महानवमी पर ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, विधि, भोग, मंत्र, कथा और आरती

Summary :

शारदीय नवरात्रि का नवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है, जिसे महानवमी या दुर्गा नवमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सफलता, शक्तियां और आठों सिद्धियां प्रदान करती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। साल 2026 में, नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 8:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को सुबह 9:31 बजे समाप्त होगी।

Navratri Day 9 Puja: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। आज शारदीय नवरात्रि का नवां दिन है। नवरात्रि की नवमी तिथि मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप को समर्पित है। इस दिन को महानवमी या दुर्गा नवमी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सफलता और शक्तियां देती हैं और उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इस दिन विधि-विधान से माता की पूजा करना और उन्हें उनकी पसंद का भोग लगाना बहुत खास माना जाता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व नाम की ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही मिलती हैं।

पूजा का शुभ समय  (Navratri Day 9 Puja Shubh Muhurat)

नवमी तिथि की शुरुआत: 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:51 बजे
नवमी तिथि की समाप्ति: 20 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:31 बजे
पूजा और कन्या पूजन का सही समय: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच।

मां सिद्धिदात्री के प्रिय भोग (Navratri Day 9 Bhog)

Maa Siddhidatri
Maa Siddhidatri (AI Generated)

मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूरी, खीर, नारियल और हलवा बहुत पसंद है और पूजा में इनका विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि ये सभी चीजें माता को अत्यंत प्रिय हैं। इसके अलावा आप मिठाई और पक्के फलों का भोग भी अर्पित कर सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री का शुभ रंग (Navratri Day 9 Color)

नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है, जो हर प्रकार की सिद्धियां और पूर्णता देने वाली देवी हैं। इस खास दिन का शुभ रंग पीकॉक ग्रीन और पिंक है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा की विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • पूजा की जगह और घर के मंदिर में गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें।
  • चौकी पर मां सिद्धिदात्री की तस्वीर या मूर्ति रखें। माता को चंदन, चावल, लाल फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
  • माता को हलवा, पूरी, काले चने, खीर और नारियल का प्रसाद लगाएं।
  • पूजा के दौरान माता के मंत्रों का जाप करें।
  • महानवमी के दिन हवन और कन्या पूजन का विशेष विधान है। छोटी बच्चियों को भोजन कराएं, उनका आशीर्वाद लें और उन्हें तोहफे दें।
  • पूजा पूरी करने के बाद मां सिद्धिदात्री की आरती करें और परिवार के लोगों में प्रसाद बांटें।

मां सिद्धिदात्री के मंत्र (Maa Siddhidatri Mantra)

Maa Siddhidatri
Maa Siddhidatri Puja (AI Generated)
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:
  • ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
  • सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
  • या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां सिद्धिदात्री की पौराणिक कथा (Maa Siddhidatri ki Katha)

पुरानी कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि की शुरुआत में चारों तरफ अंधेरा और सन्नाटा था और जीवन का कोई नामोनिशान नहीं था, तब आदिशक्ति ने प्रकाश के रूप में प्रकट होकर पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा दी थी। उन्होंने ही धरती, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और इंसानों को जीवन प्रदान किया। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की बहुत कड़ी तपस्या की थी। माता की कृपा से ही भगवान शिव को आठों प्रकार की सिद्धियां (अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व) प्राप्त हुई थीं। माता के आशीर्वाद से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था, जिसके बाद भगवान शिव ‘अर्धनारीश्वर’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसके अलावा, मां सिद्धिदात्री को केतु ग्रह की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है।

मां सिद्धिदात्री की आरती (Maa Siddhidatri ki Arti)

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।
तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।
तू सब काज उसके करती है पूरे।
कभी काम उसके रहे ना अधूरे।
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।