Putrada Ekadashi Vrat Katha: संतान प्राप्ति की हर बाधा होगी दूर! सावन पुत्रदा एकादशी पर जरूर करें इस पौराणिक कथा का पाठ

Summary :

23 अगस्त को पड़ने वाली सावन पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन सावन मास के कारण यह शिव और विष्णु दोनों का आशीर्वाद पाने का उत्तम दिन है। इस व्रत से अनजाने पापों का नाश होता है और संतान प्राप्ति की बाधाएं दूर होती हैं। संतानहीन दंपतियों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

Putrada Ekadashi Vrat Katha: आज यानी 23 अगस्त को सावन महीने की ‘पुत्रदा एकादशी’ का व्रत है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह व्रत सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। चूंकि एकादशी मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा के लिए होती है और सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए यह दिन भगवान विष्णु और शिवजी दोनों का एक साथ आशीर्वाद पाने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सही विधि से व्रत और पूजा करने से पुण्य मिलता है और इंसान के सभी अनजाने में हुए पाप मिट जाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग यह व्रत रखते हैं, उन्हें संतान प्राप्ति में आ रही हर तरह की रुकावट से छुटकारा मिल जाता है। जिन पति-पत्नी को संतान चाहिए, उन्हें यह व्रत जरूर रखना चाहिए। पूजा के समय कथा का पाठ बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसके बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता। यहां पर पुत्रदा एकादशी की कथा दी गई है।

पुत्रदा एकादशी की कथा

Putrada Ekadashi Vrat Katha
Putrada Ekadashi Vrat Katha (AI Generated)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, बहुत समय पहले द्वापर युग की शुरुआत में ‘महिरूपति’ नाम का एक शहर हुआ करता था। वहां ‘महीजित’ नाम का राजा राज करता था। राजा का कोई बेटा नहीं था, जिसकी वजह से वह कभी खुश नहीं रहता था। बेटा पाने के लिए राजा ने बहुत सारे उपाय किए, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली।

एक दिन राजा ने अपने राज्य के सभी ऋषि-मुनियों, साधुओं और विद्वानों को बुलाया। राजा ने उन सभी से बेटा पाने का उपाय पूछा। राजा की बात सुनकर सबने बताया कि राजा ने अपने पिछले जन्म में सावन महीने की एकादशी के दिन एक प्यासी गाय को पानी पीने से रोक दिया था।

उसी गाय ने राजा को बिना संतान रहने का श्राप दिया था। इसी वजह से राजा को बेटा नहीं हो रहा था। विद्वानों ने राजा को सलाह दी कि अगर वह सावन की एकादशी का सही तरीके से व्रत रखेगा, तो उसे इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। राजा ने उनकी बात मान ली।

राजा ने पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा, पूजा की और भगवान विष्णु से बेटा देने की प्रार्थना की। इसके कुछ समय बाद राजा की पत्नी गर्भवती हुई और उन्होंने एक सुंदर बेटे को जन्म दिया। माना जाता है कि तभी से संतान की इच्छा रखने वाले लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने लगे।

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि (Putrada Ekadashi 2026)

Putrada Ekadashi 2026
Putrada Ekadashi 2026 (AI Generated)
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • घर के पूजा घर को अच्छे से साफ करें। इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा के समय दीपक और धूप जलाएं। भगवान शिव को फूल, माला, बेलपत्र और आक के फूल चढ़ाएं।
  • रोली, कुमकुम और प्रसाद के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
  • पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और आखिर में भगवान की आरती गाएं।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।