Radha Ashtami Vrat Katha Hindi: इस कथा के बिना अधूरा माना जाता है राधा अष्टमी का व्रत, जानें राधा रानी को क्यों मिला था पृथ्वी पर जन्म का श्राप

Summary :

राधा अष्टमी का पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिनों बाद मनाया जाता है। इस दिन भक्त राधा-कृष्ण की पूजा कर सुख, प्रेम और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गोलोक में राधा रानी ने श्री कृष्ण को अपनी सखी विरजा के साथ देखा तो उन्हें बहुत क्रोध आया। श्री कृष्ण के मित्र श्रीदामा को राधा जी का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और उन्होंने राधा को पृथ्वी पर जन्म लेने का श्राप दे दिया। बदले में राधा ने भी श्रीदामा को राक्षस कुल में जन्म लेने का श्राप दिया, जिसके कारण वे शंखचूड़ राक्षस बने।

Radha Ashtami Vrat Katha Hindi: राधा रानी को श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति देने वाली और प्रेम का रूप माना जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 15 तिथियों के बाद राधाष्टमी मनाई जाती है। इस बार ये पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने अपने एक अंश से राधा रानी के रूप में अवतार लिया था। भक्त इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा करके अपने जीवन में सुख, प्रेम और खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए प्रार्थना करते हैं। साथ ही राधा-कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दिन जो लोग व्रत रखकर पूजा करते हैं उन्हें राधा अष्टमी की पौराणिक कथा का पाठ जरूर करना चाहिए।

राधा अष्टमी की कथा

Radha Ashtami Vrat Katha Hindi
Radha Ashtami Vrat Katha Hindi (AI Generated)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्री कृष्ण गोलोक धाम में रहते थे और उनके साथ राधा रानी भी वहीं रहती थीं। एक दिन जब राधा जी किसी काम से गोलोक से थोड़ा दूर थीं, तब श्री कृष्ण अपनी एक सखी विरजा के साथ घूम रहे थे।

जब राधा जी को यह बात पता चली, तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। वे तुरंत श्री कृष्ण के पास पहुंचीं और उन्हें भला-बुरा कहने लगीं। राधा जी को इस तरह गुस्से में देखकर श्री कृष्ण के पक्के दोस्त श्रीदामा को बहुत बुरा लगा। उन्हें लगा कि राधा जी ने श्री कृष्ण के साथ गलत व्यवहार किया है। इसलिए गुस्से में आकर श्रीदामा ने राधा जी को श्राप दे दिया कि उन्हें गोलोक छोड़कर पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ेगा।

यह श्राप सुनकर राधा जी का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने बदले में श्रीदामा को भी श्राप दे दिया कि वे राक्षस कुल में जन्म लेंगे और अपने कर्मों की वजह से मारे जाएंगे। इसी श्राप के कारण श्रीदामा का जन्म शंखचूड़ नाम के राक्षस के रूप में हुआ। शंखचूड़ भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था, जिसे बाद में भगवान शिव ने युद्ध में हराया था। दूसरी तरफ, राधा जी का भयानक गुस्सा देखकर उनकी सखी विरजा बहुत दुखी हुई और वहां से चली गई। बाद में वह एक नदी के रूप में बदल गई।

इस तरह एक-दूसरे को श्राप देने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने राधा जी को प्यार से समझाया। उन्होंने कहा कि प्रिय, अब आपको पृथ्वी पर जन्म लेना ही पड़ेगा। वहां आप वृषभानु जी और कीर्ति देवी की बेटी के रूप में जन्म लेंगी। दुनिया की नजरों में आपका विवाह रायाण नाम के एक व्यापारी से होगा, जो मेरा ही एक रूप होगा। इस तरह पृथ्वी पर भी आप मेरी प्रिय बनकर रहेंगी, लेकिन वहां हमें अलग होने का दुख और मिलने की खुशी दोनों का अनुभव करना होगा।

भगवान श्री कृष्ण की बात के बाद योगमाया ने कीर्ति देवी के गर्भ में प्रवेश किया। जब कीर्ति देवी को बच्चे के जन्म का समय आया, तब योगमाया हवा के रूप में वहां पहुंचीं और उसी पल राधा रानी एक छोटी बच्ची के रूप में प्रकट हो गईं। इस तरह राधा जी का जन्म पृथ्वी पर हुआ और वे वृषभानु जी की दुलारी बेटी बनकर बरसाना धाम में बड़ी हुईं।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।