Sita Navami Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में सीता नवमी का खास महत्व है। पुरानी कथाओं के अनुसार, वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नौवीं तारीख को माता सीता का जन्म हुआ था। इसीलिए हर साल इस दिन को उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशियां आती हैं और सौभाग्य बढ़ता है।
Sita Navami Kab Hai 2026: सीता नवमी 2026 तिथि

पूजा का शुभ समय: 25 अप्रैल को सुबह 10:58 से दोपहर 01:34 बजे के बीच।
Sita Navami Vrat Katha: सीता नवमी की पौराणिक कथा
सीता नवमी की कथा के अनुसार, पुराने समय में मारवाड़ में देव दत्त नाम का एक ज्ञानी ब्राह्मण अपनी पत्नी शोभना के साथ रहता था। देव दत्त बहुत धार्मिक थे, लेकिन उनकी पत्नी शोभना का चरित्र अच्छा नहीं था। वह अपने पति को धोखा देकर गलत कामों में लग गई थी। जब पूरे गांव को यह बात पता चली और लोग उसकी बुराई करने लगे, तो उसने गुस्से में आकर पूरे गांव को आग लगा दी। उस आग में वह खुद भी जलकर मर गई। अपने बुरे कामों की वजह से अगले जन्म में शोभना का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। उसे कुष्ठ रोग हो गया और वह अंधी भी हो गई। वह भीख मांगकर अपना गुजारा करने लगी।
एक बार वह भटकते हुए कौशल पुरी पहुंची। उस दिन वहां सीता नवमी मनाई जा रही थी। उसने लोगों से खाना मांगा, लेकिन एक व्यक्ति ने कहा, “आज व्रत है, आज अनाज नहीं मिलेगा। तुम कल आना।” बहुत जिद करने पर उस व्यक्ति ने उसे तुलसी के पत्ते और पीने के लिए जल दे दिया। उसे ग्रहण करने के कुछ देर बाद ही उस महिला की मृत्यु हो गई। लेकिन अनजाने में उसने तुलसी और जल लेकर सीता नवमी का व्रत पूरा कर लिया था। माता सीता ने उसे माफ कर दिया और उसे स्वर्ग में जगह मिली।
अपने अगले जन्म में वह कामरूप देश की महारानी कामकला बनीं। उन्हें अपने पिछले जन्मों की बातें याद थीं, इसलिए उन्होंने माता सीता और भगवान राम के कई मंदिर बनवाए और अपना पूरा जीवन उनकी सेवा में लगा दिया।
Sita Navami Puja Vidhi: पूजा की आसान विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
- साफ मन से व्रत का संकल्प लें।
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान राम और माता सीता की मूर्ति रखें।
- माता सीता को चुनरी, बिंदी, चूड़ियां और सिंदूर जैसे सुहाग का सामान चढ़ाएं।
- दीपक जलाकर ‘ॐ श्री सीतायै नमः’ मंत्र का जाप करें।
- रामचरितमानस या सुंदरकांड का पाठ करें।
- सीता माता धरती से प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन धरती और हल की पूजा भी करें।
- मिठाई का भोग लगाएं और आरती करें।
- इसके बाद में जरूरतमंदों को जल, अनाज और वस्त्र का दान करें।


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