Sita Navami Kaise Manate Hai: हिंदू धर्म में हर एक त्योहार का अपना-अपना महत्व होता है। सनातन धर्म में जब भी कोई त्योहार आता है, तो खासकर महिलाएं इसे बड़े ही धूम-धाम से मनाती हैं। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता प्रकट हुई थीं। इस दिन राम मंदिरों में बड़े ही धूम-धाम से पूजा-अर्चना की जाती है। सीता नवमी के दिन सुहागिन महिलाएं अपने परिवार और सौभाग्यवती जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस साल सीता नवमी 25 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर पूजा का भरपूर फल मिलता है।
Sita Navami Kaise Manate Hai: सीता नवमी के दौरान जरूर करें ये काम

Sita Navami Par Puja Kaise Kare: सीता नवमी 2026 पूजा विधि
- सीता नवमी के दिन भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा करने का सबसे शुभ दिन माना गया है।
- इस दिन व्यक्ति को भोर में उठकर स्नान करके साफ़ कपड़े पहनने चाहिए। फिर पूजा की शुरुआत करना चाहिए।
- इस दिन पूजा करने से पहले लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर माता सीता और भगवान श्रीराम की मूर्ति रखें।
- इसके साथ ही उसके पास में कलश रखें। फिर कलश में पानी भरकर उसमें सिंदूर, अक्षत और भोग अर्पित करें।

- फिर माता सीता की पूजा शुरू करें। उसी दौरान उन्हें सिंदूर, अक्षत, फूल, माला, कपड़े और सोलह श्रृंगार के साथ भोग लगाएं।
- उसके बाद भगवान श्रीराम को पीला चंदन, फूल, माला, अक्षत और भोग लगाएं।
- आखिरी में घी का दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें। इसके बाद सीता चालीसा, मंत्र और व्रत कथा जप करें।
- आखिरी में माता सीता और श्रीराम की आरती करें और पूजा में हुई गलती के लिए माफ़ी मांगे।
Sita Navami Par Kya Karna Chaiye: सीता नवमी पर क्या करें

- इस दिन घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की मूर्ति रखें, और उनको पीले-लाल फूल और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
- जीवन में सुख-समृद्धि के लिए “ॐ पतिव्रताय नमः” या “सीताये नमः” मंत्र का जाप करें।
- सीता नवमी के दिन पति-पत्नी को एक-दूसरे की कलाई पर लाल कलर का सूत्र बांधना बेहद शुभ माना जाता है।
- इस दिन माता सीता को खीर का भोग लगाएं फिर उस प्रसाद को घर के सदस्यों में बांट दें।
- सीता नवमी के दिन ज़रूरतमंदों को कपड़े, खाना या अनाज का दान करने से शुभ परिणाम मिलते हैं।
Goddess Sita Birth Story: पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब खेत की जुताई करने गए थे, तभी उन्हें जमीन से एक छोटी की कन्या प्राप्त हुई, जो बड़ी होकर माता सीता के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उस कन्या को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है, जो पृथ्वी पर धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिए आई थीं।


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