Balwan Singh Daulatpuria Interview : हरियाणा की राजनीति में आज एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने 15 साल पुराना इतिहास जीवंत कर दिया। एक तरफ विधानसभा परिसर के भीतर सत्ता पक्ष की कार्यवाही चल रही थी, तो दूसरी तरफ गेट के बाहर 43 डिग्री की तपती लू और चिलचिलाती धूप में विपक्ष (कांग्रेस) ने अपना ‘समांतर सदन’ चलाया।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित तमाम कांग्रेसी विधायकों ने टेंट लगाकर सदन की कार्यवाही की, जिसका उद्देश्य सरकार के ‘अड़ियल रवैये’ और ‘जनता के पैसे की बर्बादी’ का विरोध करना था।
विधानसभा के बाहर 43 डिग्री की तपती लू में जब विपक्ष अपना ‘समांतर सदन’ चला रहा था, उसी माहौल में पंजाब केसरी के संवाददाता पंखिल वर्मा ने फतेहाबाद से कांग्रेस विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया से खास बातचीत की। एसवाईएल से लेकर फतेहाबाद के पलायन तक हर मुद्दे पर विधायक ने बेबाकी से अपनी बात रखी।
विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने इस विशेष सत्र को पूरी तरह ‘औचित्यहीन’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बजट सत्र संपन्न होने और प्रदेश में निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बावजूद एक दिन का सत्र बुलाना केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने का एक जरिया है।
‘रील्स बनाने के लिए बुलाया गया सत्र’
साक्षात्कार के दौरान विधायक बलवान सिंह ने दो टूक कहा, “जब विधानसभा उस विषय (महिला आरक्षण बिल) में कोई कानूनी दखल दे ही नहीं सकती जो केंद्र का मामला है, तो सत्र बुलाने का क्या लाभ? भाजपा केवल अपनी ‘रील्स’ बनाने और इवेंट मैनेजमेंट के लिए हरियाणा की ढाई करोड़ जनता के खून-पसीने की कमाई को व्यर्थ कर रही है। हमने समांतर सदन चलाकर यह दिखाया कि बिना सरकारी खर्च के भी लोकतांत्रिक चर्चा की जा सकती है।”
एसवाईएल: हरियाणा की लाइफलाइन पर सरकार की ‘नील प्रोग्रेस’
विधायक ने एसवाईएल (SYL) के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे हरियाणवी की ‘जीवनरेखा’ बताया। उन्होंने भावुक होते हुए पुराने दौर को याद किया जब पानी की कमी के चलते लोग बाजरे की रोटी खाने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से भाजपा सरकार की प्रोग्रेस इस मामले में शून्य रही है।
बलवान सिंह ने कहा, “पंजाब में हमारी बनी-बनाई नहर को मिट्टी से भर दिया गया और हरियाणा सरकार मूकदर्शक बनी रही। यहाँ तक कि मौजूदा बजट में एसवाईएल का जिक्र तक न होना हमारे कानूनी पक्ष को कमजोर करता है। यह सरकार हरियाणा के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।”
महिला आरक्षण और परिसीमन पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए विधायक ने इसे ‘आंखों में धूल झोंकने’ वाला कदम बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि मंशा साफ होती तो इसे 2024 से ही लागू किया जाता। उन्होंने दक्षिण भारत बनाम उत्तर भारत के राजनीतिक संतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तर भारत को फायदा और दक्षिण को नुकसान होगा, जिससे देश का संघीय ढांचा प्रभावित हो सकता है।
फतेहाबाद के विकास पर चिंता: ‘बुजुर्गों का जिला’ बनने की कगार पर
अपने हल्के फतेहाबाद की समस्याओं पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहा कि क्षेत्र में उद्योगों और रोजगार का अभाव है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि इसे किसी दूरदराज के क्षेत्र के बजाय फतेहाबाद हेडक्वार्टर पर बनाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रोजगार के साधन पैदा नहीं किए गए और आईएमटी (IMT) या कृषि आधारित उद्योग नहीं लगाए गए, तो 20 साल बाद फतेहाबाद केवल ‘बुजुर्गों का जिला’ बनकर रह जाएगा क्योंकि युवा पलायन कर रहे हैं।
मुख्य अंश:
* विपक्ष का तर्क: असंवैधानिक सत्र में शामिल होना न्यायसंगत नहीं, इसलिए किया बहिष्कार।
* सेम की समस्या: रंगोई खरीफ चैनल को आरसीसी बनाने की मांग ताकि 55 गांवों की जमीन बंजर होने से बचे।
* भेदभाव का आरोप: विपक्ष के विधायकों के क्षेत्रों में विकास कार्यों को फाइलों के जाल में उलझा रही सरकार
यह भी पढ़ें – 30 अप्रैल आखिरी मौका, हरियाणा में स्व-गणना पूरी करने की अपील, 1 मई से शुरू होगा अभियान


Download Android App
Download iOS App




