Palwal 12 Deaths In 15 Days : इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब हरियाणा के पलवल से गंदा पानी पीने से मौत के मामले सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार 15 दिनों के भीतर 12 लोगों के मरने की खबर है जिसमें 5 बच्चे शामिल हैं। मामला पलवल जिले के चांयसा गांव का है।
बताया जा रहा है कि 31 जनवरी को चायंसा गांव में पीलिया से संबंधित मौतों की पहली रिपोर्ट दर्ज की गई थी। एक दिन बाद ही त्वरित प्रतिक्रिया दल को तैनात किया गया। इसके बाद चिकित्सा शिविर, घर-घर सर्वेक्षण और ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की गई।
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में इस हादसे के पीछे दूषित पेयजल और हेपेटाइटिस (काला पीलिया) के संक्रमण को मुख्य वजह माना जा रहा है। गांव में अचानक शुरू हुई इस बीमारी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मरने वालों में 8 साल से लेकर 75 साल तक के लोग शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि 27 जनवरी से लेकर 11 फरवरी के बीच 7 मौतें हुईं, इनमें से से 4 तेज हेपेटाइटस और लीवर फेलियर के चलते हुई। बाद में रिपोर्ट में हुई अन्य मौतों की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकतर मरीजों ने बुखार, पेट दर्द, उल्टी और पीलिया जैसे लक्षणों की शिकायत की थी, जिसके बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।
Palwal 12 Deaths In 15 Days : अभी भी बीमार की लोग

गांव वालों के अनुसार, मरने वालों में हुफैज (11), सारिका (14), हुमा (16), दिलशाद (20), शमसुद्दीन (42), जमीला (67) और पायल (8) जैसे नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मौत का आंकड़ा आधिकारिक संख्या (12) से कहीं ज्यादा हो सकता है क्योंकि कई लोग अभी भी निजी अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
Palwal Death News : जनसंख्या में बड़ा गांव चांयसा
बता दें, चायंसा हरियाणा के पलवल जिले की हथीन तहसील में स्थित एक बड़ा गांव है, जहां कुल 1567 परिवार रहते हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार, चायंसा गांव की जनसंख्या 10454 है, जिसमें 5515 पुरुष और 4939 महिलाएं हैं। चायंसा में 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों की जनसंख्या 2444 है, जो गांव की कुल जनसंख्या का 23.38% है। चायंसा गांव का औसत लिंग अनुपात 896 है, जो हरियाणा राज्य के औसत 879 से अधिक है।
Contaminated Drinking Water In Palwal : इंदौर सरीखा मामला
बता दें, यह मामला मध्य प्रदेश के इंदौर जैसा है जहां पिछले महीने जहरीले पानी से 16 लोगों की मौत के कुछ हफ्तों बाद ये मौतें सामने आई थी, जिससे पूरे देश में दूषित पेयजल को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी थी।
हेपेटाइटिस A, B, C और E की जांच

बता दें, पलवल की चीफ मेडिकल ऑफिसर सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि चांयसा में घट रही इन घटनाओं की बड़े स्तर पर जांच और स्क्रीनिंग की जा रही है। उन्होंने कहा, “अब तक करीब 1,500 लोगों की जांच की गई है, जिनमें मृतकों के करीबी लोग भी शामिल हैं। लगभग 800 लोगों का ओपीडी में इलाज हुआ है और उनके खून के सैंपल हेपेटाइटिस A, B, C और E के लिए जांचे गए हैं।”
210 लोगों के रक्त विश्लेषण में हेपेटाइटिस B के दो और हेपेटाइटिस C के 9 मामले सामने आए हैं। हेपेटाइटिस A और E के सभी सैंपल नेगेटिव पाए गए हैं। स्क्रब टाइफस की रिपोर्ट का इंतजार है। तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अब तक एकत्र किए गए 107 घरेलू जल नमूनों में से 23 गुणवत्ता जांच में विफल रहे, जो बैक्टीरियल संक्रमण और अपर्याप्त क्लोरीनेशन का संकेत देते हैं। दूसरी जांच में स्टोरेज टैंकों में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए। कई नमूनों में क्लोरीन मौजूद नहीं था, जिसे सुधारात्मक कदम उठाने से पहले नोट किया गया।
पानी की आपूर्ति
निवासियों की पानी की आपूर्ति, भूमिगत भंडारण टैंकों और टैंकरों पर निर्भरता है। रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) से उपचारित पानी पड़ोसी क्षेत्रों से लाया जाता है। भूमिगत टैंकों में अनियमित रूप से पानी भरने और अपर्याप्त क्लोरीनेशन के कारण जलजनित संक्रमणों का खतरा बढ़ गया है।
पशुओं में संक्रमण नहीं

अधिकारियों ने बताया कि लेप्टोस्पाइरोसिस टेस्ट नेगेटिव आया है, और पशु चिकित्सा निरीक्षणों से पशुओं से संक्रमण की संभावना से इनकार किया गया है। एहतियाती उपाय के रूप में, जल शोधन के लिए लगभग 15,000 हैलोजन टैबलेट वितरित किए गए हैं, और एक हेल्पलाइन (01275-240022) स्थापित की गई है।
स्वास्थ्य अधिकारी की तरफ से जानकारी है कि वे मौतों के सटीक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सा, पर्यावरणीय और व्यवहारिक कारकों की जांच कर रहे हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि स्थिति स्थिर होने तक निगरानी और चिकित्सा शिविर जारी रहेंगे।
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