Medicine : मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवा संबंधी भ्रम को कम करने के उद्देश्य से सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने अलग-अलग एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआई) वाली दवाओं के लिए एक ही ब्रांड नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव जारी किया है।
नियामक का मानना है कि इस तरह की ब्रांडिंग से मरीजों, डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे उपचार में गंभीर त्रुटियों की आशंका बढ़ जाती है।
(CDSCO) ने इस प्रस्ताव पर सभी संबंधित पक्षों और आम लोगों से 17 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यह कदम उन प्रस्तुतियों के बाद उठाया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ दवा कंपनियां एक ही लोकप्रिय ब्रांड नाम के तहत अलग-अलग सक्रिय तत्वों वाली दवाओं को बेच रही हैं। इस मामले की समीक्षा ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (डीसीसी) ने की।
समिति ने पाया कि अलग-अलग एक्टिव इंग्रीडिएंट वाली दवाओं के लिए समान ब्रांड नाम का उपयोग उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है और दवा के सही उपयोग को लेकर भ्रम पैदा कर सकता है। डीसीसी ने अंतिम निर्णय से पहले व्यापक स्तर पर हितधारकों से परामर्श लेने की सिफारिश भी की है।
“अम्ब्रेला ब्रांडिंग कंपनियों की पहचान बनाने में मदद करती है”
दिल्ली स्थित एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने कहा कि अम्ब्रेला ब्रांडिंग कंपनियों की पहचान बनाने में मदद करती है, लेकिन जब एक ही मूल ब्रांड नाम का इस्तेमाल अलग-अलग सक्रिय तत्वों वाली दवाओं के लिए किया जाता है, तब दवा लिखने, वितरित करने और मरीज तक पहुंचाने के दौरान गंभीर गलतियां हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से मरीजों की सुरक्षा मजबूत होगी और दवा संबंधी भ्रम की स्थिति काफी हद तक समाप्त की जा सकेगी। बता दें कि CDSCO की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि एक जैसे ब्रांड नाम मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं और उपचार प्रक्रिया में अनजाने में गलत दवा दिए जाने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
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