नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
6 सितंबर 2026 (रविवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रात 7:29 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। शाम को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायी रहेगा।
रविवार सुबह 6:14 बजे सूर्योदय और शाम 6:36 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 12:48 बजे चंद्रोदय और दोपहर 3:05 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि चंद्रमा रात 7:52 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा, पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा।
रविवार हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन व्यतीपात योग रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 10:32 से दोपहर 12:02 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल शाम 5:03 बजे से 6:36 बजे और गुलिक काल दोपहर 3:30 से 5:03 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 12:25 से 1:58 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
रविवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
–आईएएनएस
एसडी/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)



Download Android App
Download iOS App



