नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। अल्जाइमर रोग के शुरुआती चरण से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नए अध्ययन से उम्मीद जगी है। परीक्षणाधीन दवा डिरानर्सेन के क्लीनिकल ट्रायल में ऐसे संकेत मिले हैं कि यह दवा याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में होने वाली गिरावट की रफ्तार को धीमा कर सकती है। साथ ही, इसने बीमारी से जुड़े खास प्रोटीन के स्तर को भी कम करने में सफलता दिखाई है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन हॉस्पिटल्स (यूसीएलएच) की एक न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर के अनुसार डिरानर्सेन के ट्रायल में मरीजों की सोचने-समझने और याद रखने की क्षमता में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी देखी गई। उन्होंने बताया कि दवा अभी परीक्षण के चरण में है और इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
डिरानर्सेन का परीक्षण सीईएलआईए नामक वैश्विक अध्ययन के तहत किया गया, जिसमें शुरुआती चरण के अल्जाइमर से पीड़ित 416 मरीजों को शामिल किया गया। 18 महीने तक चले इस अध्ययन में दवा की विभिन्न खुराकोंका परीक्षण किया गया। इनमें 60 मिलीग्राम की खुराक लेने वाले मरीजों में सबसे बेहतर परिणाम देखने को मिले।
शोध के मुताबिक, 60 मिलीग्राम डोज लेने वाले मरीजों में प्लेसीबो की तुलना में बीमारी बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी रही। अलग-अलग जांचों में यह कमी 26 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक देखी गई।
अल्जाइमर बीमारी में टाउ प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। यह प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने और बीमारी को बढ़ाने से जुड़ा माना जाता है। डिरानर्सेन को इसी टाउ प्रोटीन के बनने की प्रक्रिया को कम करने के लिए तैयार किया गया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दवा ने मरीजों के मस्तिष्कमेरु द्रव (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) में मौजूद कुल टाउ प्रोटीन (टोटल टाउ) के स्तर को 50 से 65 प्रतिशत तक घटा दिया। इसके अलावा, पहली बार टाउ प्रोटीन को लक्षित करने वाली किसी दवा के परीक्षण में पीईटी स्कैन के जरिए मस्तिष्क में टाउ से जुड़े परिवर्तनों में भी कमी देखी गई।
प्रोफेसर ने कहा कि सीईएलआईए अध्ययन के परिणाम इस बात के संकेत देते हैं कि टाउ प्रोटीन के स्तर को कम करने से मरीजों को वास्तविक चिकित्सीय लाभ मिल सकता है। उनके अनुसार, डिरानर्सेन से प्राप्त परिणाम अल्जाइमर के उपचार के क्षेत्र में अब तक के सबसे उत्साहजनक निष्कर्षों में शामिल हैं और इसी आधार पर इसे बड़े स्तर के अगले चरण के परीक्षणों तक ले जाया जा रहा है।
अध्ययन में दवा की सुरक्षा प्रोफाइल भी संतोषजनक रही। ज्यादातर मरीजों में साइड इफेक्ट हल्के या मध्यम स्तर के रहे। अध्ययन पूरा करने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों ने आगे के लंबे समय तक चलने वाले ट्रायल में शामिल होने की इच्छा जताई।
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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