CBSE ने नौवीं में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा के मूल्यांकन का बदला तरीका

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CBSE : नौवीं कक्षा के छात्र का अब तीसरी भाषा में आकलन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वह भाषा को कितना समझते हैं, भाषा को कितनी सहजता से बोलते हैं और रोजमर्रा के संवाद में उसका कितना प्रभावी इस्तेमाल कर पाते हैं। दरअसल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नौवीं में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा (आर-3) के मूल्यांकन का तरीका बदल दिया है। बोर्ड ने नया आर-3 भाषा मूल्यांकन ढांचा लागू करते हुए सभी संबंधित स्कूलों को इसे इसी सत्र से लागू करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था में…

CBSE : नौवीं कक्षा के छात्र का अब तीसरी भाषा में आकलन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वह भाषा को कितना समझते हैं, भाषा को कितनी सहजता से बोलते हैं और रोजमर्रा के संवाद में उसका कितना प्रभावी इस्तेमाल कर पाते हैं। दरअसल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नौवीं में पढ़ाई जाने वाली तीसरी भाषा (आर-3) के मूल्यांकन का तरीका बदल दिया है।

बोर्ड ने नया आर-3 भाषा मूल्यांकन ढांचा लागू करते हुए सभी संबंधित स्कूलों को इसे इसी सत्र से लागू करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था में तीसरी भाषा के 100 अंकों के मूल्यांकन में 40 अंक सुनने और बोलने के कौशल, 15 अंक रचनात्मक लेखन, 30 अंक भाषा अधिगम संसाधनों पर आधारित पढ़ने लिखने का मूल्यांकन व 15 अंक प्रोजेक्ट कार्य के निर्धारित किए गए हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि पूरे शैक्षिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों का मूल्यांकन विभिन्न कक्षा गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा।

तीसरी भाषा की पढ़ाई किताब तक नहीं रहेगी सीमित

इनमें चित्र का वर्णन, समूह चर्चा, भूमिका निभाना (रोल प्ले) कहानी सुनाना, व्यक्तिगत अनुभव साझा करना,घोषणाएं सुनकर उत्तर देना और वाद-विवाद जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इतना ही नहीं शिक्षकों को छात्रों की रुचि के अनुसार, गतिविधियों चुनने की भी छूट दी गई। यानि तीसरी भाषा की पढ़ाई अब केवल किताब और उत्तर पुस्तिका तक सीमित नहीं रहेगी।

रचनात्मक लेखनखंड में अनौपचारिक निमंत्रण, संदेश, चित्र वर्णन, लघु कहानी और दैनिक जीवन के संवाद लेखन जैसे प्रश्न होंगे, वहीं पढ़ने और लिखने का मूल्यांकन एनसीईआरटी के लर्निंग रिसोर्स पर आधारित होगा। इसके अलावा स्थानीय सांस्कृतिक, लोक कला, तकनीकी नवाचार, राष्ट्रीय पहल और स्थानीय साहित्यकारों जैसे विषयों पर भी प्रोजेक्ट भी तैयार कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी भाषा को अपने परिवेश से जोड़कर सीख सकें।

सीबीएसई ने बताया कि आर-3 भाषा के लर्निंग रिसोर्स एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं और सभी संबद्ध स्कूलों से इनको कक्षा शिक्षण में शामिल करने को कहा गया है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कि उसे अवधारणा के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमे भाषा सीखने को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक कौशल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।

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Avinay