कटनी, 7 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना में मलबे में दबने से कटनी के 19 वर्षीय छात्र अक्षत यादव की मौत हो गई। अक्षत दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम (ऑनर्स) का छात्र था। हादसे की खबर कटनी पहुंचने के बाद परिवार और तुलसी नगर कॉलोनी में शोक का माहौल है।
स्थानीय निवासी संदीप त्रिपाठी ने बताया कि अक्षत यादव के परिवार को मैं करीब 12-13 साल से जानता हूं। अक्षत को बेहद होनहार छात्र बताते हुए उन्होंने कहा कि उसने डीपीएस से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद सीयूईटी परीक्षा के जरिए उसका दाखिला दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम (ऑनर्स) में हुआ था। अक्षत करीब डेढ़ साल से दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा था। हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर वह कटनी स्थित अपने घर आया था। त्योहार मनाने के बाद वह वापस दिल्ली चला गया था।
उन्होंने बताया कि हादसे की जानकारी रात करीब 7 बजे मिली कि जिस इमारत में अक्षत रहता था, वह ढह गई है। खबर मिलते ही परिवार और मोहल्ले के लोग चिंतित हो गए। इसके बाद पार्षद डब्बू रज्जब के साथ अक्षत की मां रातों-रात दिल्ली रवाना हुईं, जबकि उसके पिता उस समय राजस्थान में थे और वहां से सीधे दिल्ली पहुंचे। दिल्ली के ट्रॉमा सेंटर में हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान की प्रक्रिया चल रही थी। अक्षत की मां ने उसके पैर के निशान और टी-शर्ट के आधार पर उसकी पहचान की, जिसके बाद परिवार को उसकी मौत की पुष्टि हुई।
अक्षत के दोस्त कृष्णा रजत ने बताया कि उसे भी घटना की जानकारी रात करीब 7 बजे पिता के फोन से मिली। दोपहर में हादसे की खबर देखी गई थी, लेकिन तब यह स्पष्ट नहीं था कि ढही हुई इमारत में अक्षत भी रहता था। कृष्णा ने बताया कि जानकारी मिलते ही दोस्त अक्षत के घर पहुंचे। वहां उसकी मां और छोटी बहन की हालत बेहद खराब थी। उसके पिता भी परिवार के साथ दिल्ली गए।
कृष्णा ने कहा कि दोस्त रात करीब 12 बजे तक अक्षत के बारे में सही जानकारी हासिल करने की कोशिश करते रहे। इस दौरान उन्हें ऐसी सूचनाएं मिलती रहीं कि अक्षत सुरक्षित है। हालांकि, सुबह दोबारा जानकारी जुटाने पर पता चला कि ये खबरें गलत थीं और किसी ने अफवाह फैलाई थी।
अक्षत के दोस्त ने आगे कहा कि अक्षत ने सीयूईटी पास कर डीयू में बीकॉम (ऑनर्स) में दाखिला लिया था। वह कॉलेज की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा था। परिवार और अक्षत के भविष्य को लेकर कई सपने थे, लेकिन सत्य निकेतन की घटना ने परिवार को गहरा सदमा दिया है।
–आईएएनएस
पीएसके
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