Delhi News : सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर के बाहर कई परिवार अपनों की तलाश में भटकते नजर आए। इन्हीं में 20 वर्षीय प्रियांशी भी थी, जो हाथ में अपने भाई पवन की तस्वीर लेकर अस्पताल के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों से एक ही सवाल पूछ रही थी “क्या आपने पवन को देखा है?” दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज का छात्र पवन हादसे के समय इमारत के अंदर था।
प्रियांशी के मुताबिक, उसने हादसे से पिछली रात ही पवन से फोन पर बात की थी। हादसे के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। पवन के साथ रहने वाले उसके रूममेट का फोन भी संपर्क में नहीं आ रहा था। प्रियांशी ने बताया कि अस्पताल में पूछताछ के दौरान उसे सिर्फ यही जानकारी मिल रही थी कि पवन वहां नहीं है। भाई की तलाश में वह एक के बाद एक अस्पताल और वार्ड में जानकारी जुटाती रही।
हादसे के कुछ ही घंटों में एम्स ट्रॉमा सेंटर के बाहर बड़ी संख्या में परिजन पहुंच गए थे। कोई अपने बेटे की तस्वीर दिखा रहा था तो कोई मोबाइल फोन पर लगातार कॉल कर रहा था। अस्पताल पहुंचने वाली हर एंबुलेंस पर लोगों की नजर थी। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के बाद कम से कम सात घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जिनमें तीन को मृत घोषित किया गया।
कई छात्र हुए हादसे का शिकार
हादसे में घायल मोतीलाल नेहरू कॉलेज के बीए छात्र नीरज बावा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वह जम्मू से दिल्ली पढ़ाई के लिए आया था। हादसे की खबर मिलने के बाद उसका बड़ा भाई दो रिश्तेदारों के साथ जम्मू से दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
परिवार को अस्पताल से सिर्फ इतना बताया गया कि नीरज गंभीर रूप से घायल है और डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं। एक अन्य छात्र अयान भी हादसे में घायल हुआ। उसके सिर और शरीर के कुछ हिस्सों में चोट आई है और उसका सफदरजंग अस्पताल में उपचार चल रहा है। सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में पीजी और किराये के मकान हैं, जहां दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ने वाले छात्र रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों से आकर यहां रह रहे हैं।



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