नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बातों से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई से एक्यूआई की समस्या का समाधान करे। वहीं, राहुल गांधी के दिवाली मिलन समारोह और एनसीपी में चल रही हलचल पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “मैं समझता हूं कि दिल्ली में पिछली बार भी इसी प्रकार की समस्या आई थी। अगर एयर क्वालिटी इंडेक्स की बात करें, तो सरकार को केवल बातों से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। हमें यह देखना होगा कि इसके क्या उपाय हो सकते हैं। पिछली बार भी यह समस्या आई थी और सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन मुझे नहीं लगता कि सरकार इस दिशा में बहुत गंभीर है।”
उन्होंने कहा कि इसमें दीर्घकालिक और अल्पकालिक, दोनों तरह की नीतियां लागू होनी चाहिए लेकिन जो हालात पैदा हो रहे हैं, उनमें सरकार का रवैया बहुत कैजुअल नजर आता है।
लगभग 15 वर्षों बाद राहुल गांधी के दिवाली मिलन समारोह के आयोजन को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा कि सबसे पहले तो दिवाली के अवसर पर सभी लोगों को बुलाया गया। हम सब एक कांग्रेस परिवार की तरह हैं और मैं कह सकता हूं कि राहुल गांधी ने भी सभी लोगों को परिवार की तरह बुलाया था। सभी लोगों के बीच बातचीत हुई और अनौपचारिक तरीके से सब एक-दूसरे से मिले।
उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा रही है कि त्योहारों के अवसर पर परिवार के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि कल का कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा। निश्चित रूप से जब आप अपने नेता से मिलते हैं, तो नई ऊर्जा मिलती है। हम लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और एक नई ऊर्जा प्राप्त की।
एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष की शरद पवार से मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि यह उनका आंतरिक मामला है। निश्चित रूप से आपने देखा होगा कि पिछली बार भी इस तरह की बातें सामने आई थीं। एक बात जरूर कहनी चाहिए कि शरद पवार एक बहुत वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। यदि एनसीपी की बात करें, तो लोग आज भी सबसे पहले शरद पवार का नाम लेते हैं लेकिन यह उनका अपना राजनीतिक मामला है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई भी चीज एक साथ आती है, तो वह किसी भी संगठन के लिए अच्छी बात होती है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो मतभेद या बिखराव कहीं भी हो, वह अच्छी बात नहीं होती। यदि दोनों पक्षों में एकजुटता आती है, तो मैं समझता हूं कि यह एक सुखद संकेत होगा। हालांकि भाजपा हमेशा चाहती है कि इस प्रकार की क्षेत्रीय पार्टियों में टूट और बिखराव हो। वह हमेशा उन्हें तोड़ने की कोशिश करती रही है।
–आईएएनएस
केके/पीएम
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