Eid Ul Fitr 2026: ईद-उल-फितर (मीठी ईद) इस्लाम का एक प्रमुख त्योहार है, जो रमज़ान के पवित्र महीने के 29 या 30 दिनों के रोज़ों की समाप्ति पर शव्वाल (दसवें महीने) की पहली तारीख को मनाया जाता है। यह अल्लाह का शुक्र अदा करने, भाईचारा बढ़ाने, सुबह सामूहिक नमाज़ पढ़ने और नए कपड़े व स्वादिष्ट मीठे पकवानों के साथ खुशियां बांटने का दिन माना जाता है। भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को मनाई जाएगी।

ईद-उल-फितर या ‘मीठी ईद’ के दिन घरों में खजूर, शीर खुरमा, मीठी सेवई और कई तरह के लजीज पकवान बनाए जाते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ मिलकर इस दावत का लुत्फ उठाते हैं। ईद के दिन घर के बड़े अपने से छोटों और बच्चों को कुछ पैसे या उपहार देते हैं, जिसे ‘ईदी’ कहते हैं। यह खुशी, भाईचारे, दान और स्वादिष्ट व्यंजनों का त्योहार है।
भाईचारे और एकता का प्रतीक
इस्लाम धर्म में ईद-उल-फितर को अल्लाह की इबादत करने और उनका शुक्र अदा करने का सबसे पवित्र मौका माना गया है। रमजान के आखिरी दिन जैसे ही चांद का दीदार होता है, लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ‘ईद मुबारक’ कहते हैं। ईद की सुबह लोग नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिदों या खुले मैदानों में सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा करते हैं। नमाज से पहले ‘फितरा’ (दान) देना हर हैसियत वाले इंसान पर फर्ज माना गया है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद मना सकें।

Eid Ul Fitr 2026: ईद का महत्व क्या है?
ईद-उल-फितर रमजान के महीने के खत्म होने की खुशी में मनाई जाती है। यह त्यौहार त्याग, प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक है। इस दिन जकात (दान) दी जाती है ताकि कोई भूखा न रहे। यह भाईचारे और समानता का संदेश देता है। ईद-उल-फितर रमज़ान के महीने के अंत का प्रतीक है, जो सुबह से शाम तक उपवास का महीना होता है। लेकिन यह सिर्फ खाने-पीने के बारे में नहीं है। यह महीना अनुशासन, धैर्य और आत्मचिंतन पर आधारित है। ईद, इस प्रकार, संतुलन की वापसी का क्षण बन जाती है। इसमें कृतज्ञता निहित है। किसी सार्थक कार्य को पूरा करने की एक शांत स्वीकृति।
#WATCH महाराष्ट्र: पुणे में ईद का चांद दिखाई दिया। कल 21 मार्च को ईद उल फितर मनाई जाएगी। #EidUlFitr pic.twitter.com/Gli5aZ0Q6R
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 20, 2026
Eid Ul Fitr 2026: ईद-उल-फ़ितर का इतिहास
ईद-उल-फ़ितर (मीठी ईद) का इतिहास 624 ईस्वी में पैगंबर हज़रत मुहम्मद द्वारा मदीना में जंग-ए-बदर की जीत के बाद शुरू हुआ। यह पवित्र महीना रमज़ान के रोज़ों की समाप्ति, अल्लाह के प्रति आभार, दान (ज़कात-उल-फ़ितर), आपसी भाईचारे और शांति के प्रतीक के रूप में शव्वाल के महीने के पहले दिन मनाया जाता है।

ALSO READ: ईरान से युद्ध के लिए हथियार नहीं देंगे! जंग के बीच एक और करीबी दोस्त ने अमेरिका से की बगावत


Download Android App
Download iOS App




